
(चतुर्पोस्ट डिजिटल डेस्क) कॉर्पोरेट जगत की सबसे बड़ी कानूनी लड़ाइयों में से एक ‘Adani vs Vedanta’ जंग का आज अंत हो गया है। National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने सोमवार को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के भविष्य पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया। कोर्ट ने अडानी समूह के रेजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को हरी झंडी दिखाते हुए वेदांता लिमिटेड की चुनौती वाली याचिका को पूरी तरह खारिज (Dismissed) कर दिया है।
अडानी के प्लान पर क्यों लगी मुहर?
जस्टिस (रिटायर्ड) अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कर्जदाताओं की समिति (Committee of Creditors – CoC) ने वेदांता के प्रस्ताव को खारिज कर सही फैसला लिया था। दरअसल, जेपी एसोसिएट्स पर कुल ₹57,000 करोड़ से अधिक का दावा (Admitted Claims) है। इस पूरी प्रक्रिया में अडानी एंटरप्राइजेज का प्लान वित्तीय मूल्यों और तुरंत वसूली (Upfront Recovery) के मामले में सबसे बेहतर पाया गया।
वेदांता की दलीलें क्यों हुईं फेल?
वेदांता लिमिटेड ने कोर्ट में तर्क दिया था कि उनकी संशोधित पेशकश (Revised Offer) ₹16,070 करोड़ की थी, जो कर्जदाताओं के लिए अधिक फायदेमंद हो सकती थी। हालांकि, CoC ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि वेदांता ने यह ‘Addendum’ तब पेश किया जब बिडिंग की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी और उसे पता चल गया था कि अडानी का ऑफर उससे बेहतर है।
“बिडिंग फ्रेमवर्क (Bidding Framework) के नियमों के तहत, प्रक्रिया पूरी होने के बाद वित्तीय प्रस्तावों में कोई बदलाव (Post-process modifications) करना वर्जित है।”
जेपी एसोसिएट्स दिवालिया प्रक्रिया: एक नजर में
नीचे दिए गए बिंदुओं से समझें कि यह पूरा विवाद आखिर था क्या:
- शुरुआत: ICICI बैंक की याचिका पर 3 जून 2024 को इलाहाबाद NCLT ने JAL को दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) में भेजा था।
- मुख्य कर्जदाता: नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) इस मामले में 85% वोटिंग शेयर के साथ सबसे बड़ी वित्तीय संस्था है।
- दावेदार: शुरुआत में 28 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन अंत में अडानी, वेदांता, डालमिया सीमेंट और जिंदल पावर जैसी 6 कंपनियां रेस में बची थीं।
- वोटिंग का नतीजा: नवंबर 2025 में हुई बैठक में CoC के 93.81% सदस्यों ने अडानी के प्लान के पक्ष में वोट किया था।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
यह विवाद केवल NCLAT तक ही सीमित नहीं रहा। वेदांता ने इस मामले को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में भी चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और NCLAT को निर्देश दिया कि वह इस मामले की तेजी से सुनवाई (Expeditious hearing) कर फैसला सुनाए। आज के फैसले के साथ ही अब अडानी समूह के लिए जेपी एसोसिएट्स की संपत्तियों का अधिग्रहण (Acquisition) करने का रास्ता साफ हो गया है।
दिग्गज वकीलों की फौज उतरी मैदान में
इस हाई-प्रोफाइल केस की पैरवी के लिए देश के सबसे महंगे और दिग्गज वकील मैदान में थे:
- वेदांता की ओर से: सीनियर एडवोकेट अभिजीत सिन्हा।
- रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP): सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और अरुण कथपालिया।
- CoC की ओर से: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता।
- अडानी समूह की ओर से: सीनियर एडवोकेट रितिन राय और करंजावाला एंड कंपनी की टीम।
chaturpost: बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ी राहत
जेपी एसोसिएट्स जैसी बड़ी कंपनी का मामला सुलझना भारतीय बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। इससे बैंकों का फंसा हुआ भारी-भरकम कर्ज वापस मिलने की उम्मीद जगी है। ट्रांजिशन वर्ड्स (Transition words) के रूप में देखें तो, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अडानी समूह जेपी एसोसिएट्स के रियल एस्टेट और सीमेंट कारोबार को किस तरह पुनर्जीवित करता है।







