शिक्षा

रिटायर्ड प्राचार्यों का दर्द: उम्र कटी सेवा में, अब ‘Pensioners Pension’ के लिए दफ्तरों के चक्कर!

रायपुर (chaturpost.com) छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में जीवनभर सेवा देने के बाद सम्मानजनक सेवानिवृत्ति (Retirement) की आस लगाए बैठे शिक्षकों के हक में एक बहुत बड़ी आवाज बुलंद हुई है। स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता (Lecturer) पद से प्राचार्य (Principal) के पद पर पदोन्नत (Promoted) होकर रिटायर हुए सैकड़ों अधिकारियों के लंबित पेंशन प्रकरणों (Pending Pension Cases) को लेकर अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है।

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ (Indian State Pensioners Federation) के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय (Mahanadi Bhawan) पहुंचकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह (IAS) से बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक (High-Level Meeting) में महासंघ ने साफ कर दिया कि सेवानिवृत्त प्राचार्यों का ‘Pensioners Pension’ रोकना उनके संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

आखिर क्यों फंसा है ‘Pensioners Pension’ का मामला? समझें पूरा गणित

दरअसल (Consequently), छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत ई (Education) एवं टी (Tribal) संवर्ग में कार्यरत अनेक वरिष्ठ व्याख्याताओं को उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले शासन द्वारा प्राचार्य (Principal) के पद पर उच्चतर पदोन्नति (Higher Promotion) प्रदान की गई थी। नियमतः, उच्च पद पर कार्यभार ग्रहण करने के बाद उनकी सेवानिवृत्ति भी उसी गरिमामयी पद से होनी चाहिए थी।

परंतु (However), प्रशासनिक शिथिलता के कारण इन अधिकारियों के सेवानिवृत्ति संबंधी आदेश (Retirement Orders) आज तक स्कूल स्तर और संभाग स्तर पर लंबित हैं। इसके परिणामस्वरूप (As a result), पूर्व में व्याख्याता पद के आधार पर जारी किए गए सेवानिवृत्ति आदेश तकनीकी रूप से अप्रभावी (Ineffective) हो चुके हैं, जबकि नियमानुसार प्राचार्य पद से पृथक एवं संशोधित सेवानिवृत्ति आदेश जारी किया जाना अनिवार्य है। इसी तकनीकी पेंच की वजह से सैकड़ों परिवारों की ‘Pensioners Pension’ अधर में लटकी हुई है।

“न मांग – न जांच प्रमाणपत्र” (No Dues Certificate) बना सबसे बड़ा रोड़ा

महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन (Official Memorandum) में बेहद कड़े शब्दों में उन कठिनाइयों का ब्यौरा दिया, जिससे रिटायर्ड अधिकारी दिन-रात जूझ रहे हैं।

विशेष रूप से (Specifically), विभाग द्वारा “न मांग – न जांच प्रमाणपत्र” (No Demand – No Enquiry Certificate) जारी करने में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है। जब तक यह सर्टिफिकेट क्लियर नहीं होता, तब तक कोषालय (Treasury) से पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति देयकों (Retirement Dues) का भुगतान संभव नहीं हो पाता।

निश्चित रूप से (Certainly), इस गंभीर विलंब के कारण सेवानिवृत्त हो चुके वयोवृद्ध अधिकारियों को भारी आर्थिक (Financial Crisis) एवं मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। कई अधिकारी तो अपनी गंभीर बीमारियों के इलाज, बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटियों के विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्वों (Social Obligations) को पूरा करने के लिए कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।

पेंशनर्स महासंघ ने सचिव के सामने रखीं ये 4 प्रमुख मांगें (Key Demands)

चतुरपोस्ट डॉट कॉम (chaturpost.com) को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, वीरेंद्र नामदेव ने सचिव कमलप्रीत सिंह के समक्ष बिंदुवार तरीके से अपनी मांगें रखी हैं, जिन्हें त्वरित रूप से लागू करने का आग्रह किया गया है:

  • प्राचार्य पद के आदेश: व्याख्याता से प्रमोट हुए सभी अधिकारियों के लिए प्राचार्य पद से संशोधित एवं पृथक सेवानिवृत्ति आदेश (Retirement Order) आपातकालीन स्थिति मानकर तत्काल जारी किए जाएं।
  • सिंगल विंडो सिस्टम: “न मांग – न जांच प्रमाणपत्र” (No Dues Clearance) की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध (Time-bound) बनाकर अधिकतम 15 दिनों के भीतर पूर्ण कराया जाए।
  • अंतरिम राहत (Interim Relief): जब तक अंतिम पेंशन प्रकरण स्वीकृत नहीं होता, तब तक प्रभावित अधिकारियों को तात्कालिक दैनिक जीवन के निर्वाह के लिए आवश्यक अंतरिम राहत राशि प्रदान करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए।
  • अधिकारियों की जवाबदेही: पेंशन फाइलों को बेवजह दबाकर रखने वाले और बाबूशाही रवैया अपनाने वाले दोषी क्लर्कों एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

फैक्ट चेक: सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने क्या दिया आश्वासन?

Chaturpost E-E-A-T Verification: हमारी संपादकीय टीम ने इस खबर की प्रामाणिकता और प्रशासनिक पक्ष को जांचने के लिए मंत्रालय के विश्वसनीय सूत्रों से संपर्क किया। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने महासंघ के प्रतिनिधिमंडल की सभी दलीलों को अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना।

इसके बाद (Subsequently), सचिव ने मौके पर ही मौजूद मातहत अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इन सभी लंबित प्रकरणों का तुरंत परीक्षण (Examination) करें। उन्होंने महासंघ को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि किसी भी सेवानिवृत्त शिक्षक या प्राचार्य के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और नियमों के दायरे में रहकर ‘Pensioners Pension’ से जुड़े मामलों का बहुत जल्द सकारात्मक निराकरण (Resolution) सुनिश्चित किया जाएगा।

“पेंशन कोई भीख नहीं, हमारा वैधानिक अधिकार है” – महासंघ के दिग्गज

मंत्रालय परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन को चेताया है। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से शामिल दिग्गज नेताओं क्रमशः आर एन ताटी, परमेश्वर स्वर्णकार, सुहास लाम्बट, ओ डी शर्मा, रूपकुमार झाड़ी, एवं पुष्पा साव ने संयुक्त रूप से कहा:

सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को समय पर उनकी पेंशन (Pensioners Pension) तथा अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ (Retirement Benefits) प्राप्त होना उनका कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित एक वैधानिक अधिकार (Statutory Right) है। शासन को इस पूरे विषय में कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय पूर्ण संवेदनशीलता के साथ त्वरित और ठोस निर्णय लेना चाहिए ताकि बुजुर्गों को बुढ़ापे में दर-दर न भटकना पड़े।”

Also read कर्मचारियों के NPS के पैसे के निवेश को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला: मिली निवेश की मंजूरी, देखें आदेश

अंततः (Ultimately), अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सचिव स्तर से मिले इस कड़े आश्वासन के बाद स्कूल शिक्षा विभाग का अमला कितनी तेजी से हरकत में आता है और छत्तीसगढ़ के इन गुरुजन-प्राचार्यों के चेहरों पर मुस्कान कब तक वापस लौटती है। चतुरपोस्ट इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button