
रायपुर/अंबिकापुर (Chaturpost News): छत्तीसगढ़ के श्रमिक संगठनों और सरकारी कर्मचारियों के गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश में अपनी लंबित मांगों और हक की लड़ाई के लिए श्रमिकों ने अब सीधे राजधानी रायपुर में हल्ला बोलने का मन बना लिया है। भारतीय मजदूर संघ (BMS) छत्तीसगढ़ प्रदेश की दो दिवसीय विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके तहत आगामी 1 अक्टूबर 2026 को रायपुर की सड़कों पर एक विशाल Shramik Akrosh Rally का आयोजन किया जाएगा।
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इस बड़े फैसले के बाद से ही प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। सरगुजा संभाग के मुख्यालय और मां महामाया की पावन नगरी अंबिकापुर में 16 एवं 17 मई 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय महाबैठक में संगठन को नए सिरे से धार देने और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का पूरा खाका (Blueprint) तैयार कर लिया गया है।
वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी में बनी आंदोलन की रणनीति (High-Level Strategic Meeting)
अंबिकापुर में आयोजित इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बीएमएस की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती शोभा सिंहदेव जी द्वारा की गई। इसके साथ ही (In addition to this), क्षेत्रीय संगठन मंत्री (मध्य क्षेत्र) सी. वी. राजेश जी और छत्तीसगढ़ प्रदेश के महामंत्री दिनेश कुमार पांडेय जी के कुशल नेतृत्व में आगामी आंदोलन की पूरी रणनीति (Strategy) तय की गई।
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बैठक में संगठन की मजबूती को प्रदर्शित करते हुए अखिल भारतीय मंत्री एवं विद्युत प्रभारी बीएमएस राधेश्याम जैसवाल जी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य गिरजा शंकर आचार्य और प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शंखध्वनि सिंह बैनफर जैसे राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के दिग्गज नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इतने बड़े नेताओं का एक मंच पर जुटना यह साफ संकेत देता है कि इस बार मजदूर संघ पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
जमीनी स्तर पर संगठन का कायाकल्प: नियुक्त किए गए 6 सेक्टर प्रभारी
बैठक के दौरान मुख्य वक्ता सी. वी. राजेश ने संगठन के विस्तार, उसकी विशिष्ट कार्यशैली तथा भारतीय मजदूर संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा (Ideology) के संबंध में उपस्थित पदाधिकारियों को विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी आंदोलन तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसकी जड़ें जमीनी स्तर (Grassroots Level) पर मजबूत न हों।
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इसी उद्देश्य से, संगठन को और अधिक प्रभावी, अनुशासित और सशक्त बनाने के लिए छह वरिष्ठ पदाधिकारियों को राज्य स्तरीय सेक्टर प्रभारी (Sector In-charge) नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त (Furthermore), प्रत्येक जिले के सुचारु संचालन और सांगठनिक विस्तार के लिए समर्पित जिला प्रभारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। जिला मंत्रियों, विभाग प्रमुखों और प्रदेश पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर जिले का सघन प्रवास (Tour) करें और कार्यकर्ताओं को उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपें।
इस महा-आंदोलन में शामिल होंगे ये प्रमुख संगठन (The United Front):
1 अक्टूबर को होने वाली इस Shramik Akrosh Rally की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी एकजुटता होने वाली है। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध (Affiliated) सभी छोटे-बड़े महासंघों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस रैली में मुख्य रूप से निम्नलिखित संगठन शामिल होने जा रहे हैं:
- राज्य कर्मचारी संघ (State Employee Association): शासकीय कर्मचारियों की पुरानी और लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाएंगे।
- आंगनबाड़ी सहायिका संघ (Anganwadi Workers Union): मानदेय वृद्धि और सेवा शर्तों में सुधार की मांग।
- निर्माण मजदूर महासंघ (Construction Workers Federation): असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा अधिकार।
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- बिजली कर्मचारी महासंघ (Electricity Employees Federation): पावर सेक्टर के संविदा और नियमित कर्मचारियों के मुद्दे।
- दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मजदूर संघ (SECR Railway Mazdoor Sangh): रेलवे के स्थानीय और ठेका श्रमिकों का समर्थन।
- मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ (Mid-Day Meal Cooks Association): न्यूनतम मानदेय और नियमितीकरण की मांग।
सभी संगठनों से शामिल होने की अपील
भारतीय मजदूर संघ के छत्तीसगढ़ प्रदेश महामंत्री दिनेश कुमार पांडेय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए प्रदेश के सभी क्षेत्रों के श्रमिकों, संविदा कर्मचारियों और दैनिक वेतनभोगियों से अपील की है कि वे अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए 1 अक्टूबर को होने वाले इस आंदोलन और उससे पहले की सभी संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी अधिकतम सहभागिता (Participation) सुनिश्चित करें।
चतुर विचार: क्या बैकफुट पर आएगी सरकार? (Editor’s Take)
निष्कर्ष के तौर पर (In conclusion), भारतीय मजदूर संघ का यह कदम छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा उछाल (Tipping Point) ला सकता है। मई के महीने में अंबिकापुर की ठंडी वादियों में तैयार हुई इस आंदोलन की ‘गर्मी’ का अहसास 1 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में देखने को मिलेगा।
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चूंकि बीएमएस देश का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन है, इसलिए इसकी Shramik Akrosh Rally को सरकार हल्के में लेने की भूल कतई नहीं करेगी। अब देखना यह होगा कि इस अल्टीमेटम के बाद क्या सरकार 1 अक्टूबर से पहले ही कर्मचारी और श्रमिक संगठनों को वार्ता के लिए बुलाती है, या फिर रायपुर की धरती पर एक ऐतिहासिक श्रमिक जनसैलाब देखने को मिलेगा। पल-पल की लाइव अपडेट के लिए बने रहिए chaturpost.com के साथ।







