Breaking NewsChhattisgarh

Chhattisgarh High Court Rules Changed: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, वकीलों की मनमर्जी पर लगा ब्रेक; अब कोर्ट में तारीख पाना हुआ मुश्किल!

बिलासपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ न्यायपालिका (Chhattisgarh Judiciary) से इस वक्त की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खबर (Important Legal News) सामने आ रही है। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (High Court of Chhattisgarh, Bilaspur) ने अपने नियमों में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक संशोधन (Major Amendment) किया है। इस नए बदलाव के बाद कोर्ट रूम के भीतर वकीलों की तरफ से मामले को टालने या अगली तारीख मांगने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है।

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General) रजनीश श्रीवास्तव की तरफ जारी की गई अधिसूचना (Official Notification) के अनुसार, हाई कोर्ट ऑफ छत्तीसगढ़ रूल्स, 2007′ (High Court of Chhattisgarh Rules, 2007) में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। यह नया नियम तत्काल प्रभाव (Immediate Effect) से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब वकीलों के लिए कोर्ट से आसानी से स्थगन (Adjournment) यानी तारीख लेना अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी।

क्यों पड़ा इस कड़े बदलाव की जरूरत? (Need for Amendment)

अक्सर देखा जाता है कि अदालतों में मुकदमों की पेंडेंसी (Pendency of Cases) बढ़ने का एक बड़ा कारण बार-बार मिलने वाली तारीखें होती हैं। वकील किसी न किसी कारण से मामले को आगे बढ़वाने के लिए आवेदन दे देते थे। इसी न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) को और अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाने के लिए माननीय हाई कोर्ट ने अपनी शक्तियों का प्रयोग किया है।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 225 और 227 (Articles 225 and 227 of the Constitution of India) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए हाई कोर्ट ने यह कदम उठाया है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामलों की सुनवाई समय पर हो और आम जनता को त्वरित न्याय (Speedy Justice) मिल सके।

हाई कोर्ट रूल्स के नियम 157 में क्या-क्या बदला? जानिए मुख्य बातें

हाई कोर्ट की तरफ से जारी नोटिफिकेशन संख्या 9309/Rules/2026 के तहत मूल नियम पुस्तिका के ‘नियम 157’ (Rule 157) में कुल चार बड़े बदलाव किए गए हैं। आइए इन बदलावों को बिंदुवार और सरल भाषा में समझते हैं:

1. रजिस्ट्रार (जुडिशियल) की जगह अब चीफ जस्टिस

  • पहले नियम 157 की पहली पंक्ति में जहां “Registrar (Judicial)” शब्द का उल्लेख था, उसे अब पूरी तरह से विस्थापित कर उसकी जगह “Chief Justice” (मुख्य न्यायाधीश) शब्द को जोड़ दिया गया है। यानी अब प्रशासनिक और न्यायिक नियंत्रण की कमान सीधे चीफ जस्टिस के हाथों में केंद्रित होगी।

2. ‘रजिस्ट्रारशब्द को हटाकर लिखा गया बेंच

  • नियम 157 के उप-नियम (3) [Sub-rule (3)] में एक और बड़ा फेरबदल किया गया है। यहां से भी “Registrar (Judicial)” शब्द को हटा दिया गया है और उसके स्थान पर अब “Bench” (पीठ) शब्द को प्रतिस्थापित किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब मामला सीधे संबंधित कोर्ट की पीठ तय करेगी, न कि कोई प्रशासनिक अधिकारी।

3. ‘He’ शब्द की विदाई, अब सर्वोपरि होगी बेंच

  • व्याकरण और विधिक स्पष्टता को सुधारते हुए उप-नियम (3) में एक और संशोधन किया गया है। जहां पहले ‘unnecessary then’ के बाद और ‘will be entitled’ के ठीक पहले “he” शब्द का इस्तेमाल होता था, उसे अब बदलकर “Bench” कर दिया गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि कोर्ट रूम के भीतर व्यक्तिगत निर्णय के बजाय ‘पीठ’ का सामूहिक या संस्थागत निर्णय ही अंतिम माना जाएगा।

4. नया उप-नियम (4) जोड़ा गया: तारीख के लिए ये है नया नियम

  • इस पूरे संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका चौथा बिंदु है। कोर्ट ने नियम 157 के बाद एक नया उप-नियम (4) [Sub-rule (4)] जोड़ दिया है। इसके तहत अब यदि किसी वकील या पक्षकार को अपने मामले में स्थगन या तारीख आगे बढ़वानी है, तो उसके लिए कड़े नियम बना दिए गए हैं।

अब कैसे मिलेगी कोर्ट से तारीख? जानिए नया प्रोसीजर (New Adjournment Procedure)

नए जोड़े गए उप-नियम (4) के मुताबिक, अब स्थगन या स्थगन के आवेदन (Application for Adjournment/Postponement) की प्रक्रिया को बेहद सख्त और सीधा कर दिया गया है:

  • पीठ को संबोधन: अब कोर्ट में मामले को टालने के लिए दिया जाने वाला कोई भी आवेदन अनिवार्य रूप से सीधे “Bench” (संबंधित माननीय न्यायाधीश की पीठ) को संबोधित होना चाहिए।
  • अधिकारियों की जिम्मेदारी: इस आवेदन को प्राप्त करने के बाद, संबंधित कोर्ट के पी.एस. (Private Secretary / निजी सचिव) या रीडर (Reader) की यह जिम्मेदारी होगी कि वे उस आवेदन को सीधे माननीय न्यायाधीश (Hon’ble Judge) के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करेंगे।
  • न्यायाधीश का विवेक: अब जज साहब खुद तय करेंगे कि वकील साहब को अगली तारीख देनी है या नहीं। यदि कारण ठोस नहीं हुआ, तो आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाएगा और मामले की सुनवाई उसी दिन होगी।

1. मूल नियम 157 में क्या लिखा था

मुख्य नियम: “The Registrar (Judicial) may postpone a matter;” यानी रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पास मामले को टालने या आगे बढ़ाने की शक्ति थी।

  • उप-नियम (3) [Sub-rule 3]: इसमें साफ लिखा है कि यदि सुनवाई से दो दिन पहले दोनों पक्षों के वकील किसी कठिनाई के कारण आपसी सहमति (Agree for adjustment/adjournment) जताते हैं, तो रजिस्ट्रार (जुडिशियल) उनकी सुविधा के अनुसार मामले की अगली तारीख दे सकता है (“…next date of hearing shall be given by the Registrar (Judicial)…”).
  • रजिस्ट्रार का विवेकाधिकार: इसी उप-नियम (3) की आखिरी लाइनों में लिखा था कि यदि रजिस्ट्रार (जुडिशियल) को लगता है कि मामले को बार-बार टाला जा रहा है या स्थगन अनावश्यक है, तो उसे मना करने (Refuse) का भी अधिकार था (“…then he will be entitled to refuse the same.”).

2. नए संशोधन (Amendment)

  • संशोधन 1: नियम 157 की पहली लाइन से “Registrar (Judicial)” शब्द को हटाकर अब “Chief Justice” कर दिया गया है। यानी अब मूल रूप से मामले को स्थगित या पोस्टपोन करने की नीतिगत शक्ति मुख्य न्यायाधीश के पास चली गई है।
  • संशोधन 2 और 3: उप-नियम (3) में जहाँ लिखा था कि अगली तारीख रजिस्ट्रार (जुडिशियल) देगा और वह मना भी कर सकता है (he will be entitled), वहाँ से रजिस्ट्रार और ‘He’ शब्द को हमेशा के लिए विलोपित कर दिया गया है। उसकी जगह अब “Bench” (पीठ) शब्द जोड़ दिया गया है।
  • संशोधन 4 (नया नियम): इसके बाद नया उप-नियम (4) जोड़कर साफ कह दिया गया कि अब स्थगन (Adjournment/Postponement) का आवेदन सीधे Bench (संबंधित जज साहब) के सामने ही पेश किया जाएगा (निजी सचिव या रीडर के माध्यम से)।

वकीलों और पक्षकारों पर क्या होगा इस फैसले का असर? (Impact of the Decision)

छत्तीसगढ़ राजपत्र (Chhattisgarh Gazette) में असाधारण प्राधिकार से प्रकाशित इस अधिसूचना के बाद विधिक गलियारों (Legal Circles) में हलचल तेज हो गई है। इस बदलाव के दूरगामी प्रभाव होने वाले हैं:

  • टालमटोल की आदत पर रोक: पहले कई बार वकील तैयारी न होने या अन्य कारणों से मामले को टालने के लिए आवेदन लगा देते थे, जिससे सुनवाई हफ्तों आगे बढ़ जाती थी। अब सीधे न्यायाधीश के सामने आवेदन जाने से इस पर लगाम लगेगी।
  • केसों का त्वरित निपटारा: जब अनावश्यक स्थगन (Unnecessary Adjournments) नहीं मिलेंगे, तो मुकदमों की सुनवाई तेजी से पूरी होगी। इससे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या में तेजी से कमी आएगी।
  • आम जनता को राहत: कोर्ट के चक्कर काट-काट कर थक चुके आम फरियादियों के लिए यह राहत भरी खबर है। तारीख पर तारीख मिलने का सिलसिला अब काफी हद तक कम हो जाएगा।
  • वकीलों को करनी होगी कड़ी मेहनत: अब वकीलों को अपने केस की पूरी तैयारी के साथ ही कोर्ट रूम में उतरना होगा। वे इस भरोसे नहीं रह सकते कि ऐन वक्त पर कोई भी बहाना बनाकर अगली डेट ले लेंगे।

छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित हुआ आधिकारिक आदेश

यह महत्वपूर्ण आदेश छत्तीसगढ़ शासन (Government of Chhattisgarh) के नवा रायपुर स्थित शासकीय मुद्रणालय (Government Press, Raipur) द्वारा बकायदा छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में प्राधिकार से प्रकाशित किया जा चुका है। यह अधिसूचना वैशाख 25, शक संवत 1948 यानी दिनांक 15 मई 2026 को आधिकारिक रूप से जारी की गई, जबकि हाई कोर्ट द्वारा यह निर्णय एक दिन पहले यानी 14 मई 2026 को ही ले लिया गया था।

Also Read 8th Pay Commission ने बढ़ाई सुझाव देने की लास्ट डेट, कर्मचारियों और पेंशनर्स के पास अब इस तारीख तक मौका!

चतुरपोस्ट (chaturpost.com) अपने पाठकों को हमेशा सटीक और विश्वसनीय खबरें (Authoritative and Trustworthy News) प्रदान करता है। हाई कोर्ट का यह नया नियम वकीलों के कामकाज के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला है। यदि आप भी कोर्ट-कचहरी के मामलों से जुड़े हैं, तो आपके लिए इस नियम को जानना बेहद जरूरी था।

Chhattisgarh High Court Rules
Chhattisgarh High Court Rules
“चतुरपोस्ट के पास मौजूद हाई कोर्ट रूल्स की मूल कॉपी के अनुसार, पहले वकीलों को आपसी सहमति से तारीख देने का अधिकार रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पास होता था। लेकिन नए संशोधन के बाद रजिस्ट्रार की इस शक्ति को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब ‘तारीख’ का फैसला सिर्फ और सिर्फ संबंधित अदालत की ‘बेंच’ (न्यायाधीश) ही करेगी।”

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button