कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ एकलव्य विद्यालय में बवाल: 15 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की साजिश? फूटा गुस्सा, आंदोलन का अल्टीमेटम!

रायपुर (chaturpost.com) छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (Eklavya Model Residential School) से एक विवादित मामला सामने आया है। प्रदेश के इन प्रतिष्ठित स्कूलों में पिछले 15 से 20 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे दैनिक वेतन भोगी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अधिकारियों की कथित मनमानी और नियमों के विपरीत की जा रही आउटसोर्सिंग (Outsourcing) के विरोध में अब कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

अखिल भारतीय राज्य सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ (All India Government Employees Federation) ने इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। महासंघ के राष्ट्रीय उप महामंत्री योगेश चौरे के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय शिष्ट प्रतिनिधिमंडल (Delegation) ने रायपुर स्थित अनुसूचित जाति/जनजाति आयुक्त कार्यालय में राज्य नोडल अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता और मंत्रालय पहुंचकर शासन के अंडर सेक्रेटरी (Under Secretary) से मुलाकात की।

अधिकारियों के साथ हुई इस मुलाकात में कर्मचारियों की समस्याओं, वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment), श्रम सम्मान राशि और बजट आवंटन (Budget Allocation) को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। यह बैठक लगभग 40 मिनट तक चली, जिसमें कर्मचारियों के शोषण और अधिकारियों की तानाशाही पर बेहद गंभीर और तीखी चर्चा हुई।

अधिकारियों की गलत व्याख्यासे 20 साल पुराने कर्मचारियों का भविष्य खतरे में!

चर्चा के दौरान राष्ट्रीय उप महामंत्री योगेश चौरे ने राज्य नोडल अधिकारी (State Node Officer) को दिल्ली (केन्द्र सरकार) द्वारा बीती 9 अप्रैल 2026 को जारी किए गए एक स्पष्ट आदेश का हवाला दिया। उन्होंने अधिकारियों के सामने यह साबित किया कि कैसे जमीनी स्तर पर बैठे अफसर दिल्ली के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

योगेश चौरे ने नियमों का विश्लेषण करते हुए बताया कि दिल्ली के आदेशानुसार, जिन संस्थाओं में नियमित भर्ती प्रक्रिया (Regular Recruitment Process) लंबित है, केवल वहीं आवश्यकतानुसार रिक्त पदों पर ही आउटसोर्सिंग की जानी चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में इसके बिल्कुल उलट किया जा रहा है।

नियमों का उल्लंघन और अधिकारियों की मनमानी का गणित:

  • क्या है नियम? यदि किसी विद्यालय में कुल 25 पदों का सेटअप है और वहां 20 दैनिक वेतन भोगी या नियमित कर्मचारी पिछले 15-20 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, तो नियम के मुताबिक शेष बचे 5 रिक्त पदों पर ही आउटसोर्सिंग की जानी चाहिए थी।
  • अधिकारियों ने क्या किया? एकलव्य विद्यालयों के प्राचार्यों (School Principals) और स्थानीय जिला स्तर के अधिकारियों ने आदेश की अपनी सहूलियत के हिसाब से गलत व्याख्या (Misinterpretation) की। उन्होंने पुराने कर्मचारियों को दरकिनार करते हुए पूरे के पूरे 25 पदों को ही प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों के हवाले कर दिया।

“एक तरफ प्रदेश सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण (Regularization) की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की इस तानाशाही से कर्मचारियों को जबरन आउटसोर्सिंग में धकेला जा रहा है। यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि इन गरीब कर्मचारियों का नियमितीकरण कभी संभव ही न हो पाए।”

योगेश चौरे, राष्ट्रीय उप महामंत्री

Eklavya School Chhattisgarh

नोडल अधिकारी ने माना लोचा‘, बोलेदिल्ली भेजा जाएगा प्रस्ताव

कर्मचारियों की इस तार्किक और कानूनी दलील को सुनने के बाद राज्य नोडल अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता भी दंग रह गए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आश्चर्य व्यक्त किया और स्वीकार किया कि मैदानी अधिकारियों द्वारा दिल्ली के आदेश की गलत व्याख्या की गई है, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।

नोडल अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि वे जल्द ही इस आदेश की सही व्याख्या करते हुए सभी जिलों के लिए नए दिशा-निर्देश (New Guidelines) जारी करेंगे। इसके साथ ही, इस विसंगति को दूर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से एक विशेष प्रस्ताव दिल्ली (केन्द्र सरकार) को भी भेजा जाएगा।

कर्मचारियों की 4 प्रमुख मांगें, जिसने सरकार की बढ़ाई टेंशन

महासंघ ने अधिकारियों के सामने केवल आउटसोर्सिंग का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि कर्मचारियों के आर्थिक शोषण से जुड़े कई अन्य ज्वलंत मुद्दों (Secondary Keywords) पर भी सरकार को घेरा:

2 जून को मंत्रालय और आयुक्त कार्यालय का होगा महा-घेराव!

इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुलाकात में एकलव्य आवासीय विद्यालय कर्मचारी संगठन की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना नेताम, सुरेश ढीढी, लोकेश वर्मा, राकेश ठाकुर, मंगलु राम उसेंडी, बहुरन सिंह पाल (जिला सचिव), दिलीप आमदे, रितेश साहू, रणवीर सिंह, कुशल नाग, बृजलाल वर्मा, सोमनाथ गोंड सहित दर्जन भर से अधिक प्रमुख पदाधिकारी और पीड़ित कर्मचारी उपस्थित थे।

महासंघ ने साफ कर दिया है कि वे केवल आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं। संगठन ने सरकार को अल्टीमेटम (Deadline) देते हुए रणनीति तैयार की है कि यदि 1 जून 2026 तक कर्मचारियों की इन जायज समस्याओं के समाधान हेतु प्रशासन की तरफ से कोई ठोस लिखित पहल नहीं की जाती है, तो 2 जून 2026 को पूरे प्रदेश के कर्मचारी रायपुर में जुटेंगे। इस दिन आयुक्त कार्यालय और मंत्रालय का ऐतिहासिक घेराव (Protest and Siege) किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

छत्तीसगढ़ के शासकीय विभागों और शैक्षणिक संस्थानों में आउटसोर्सिंग का यह विवाद अब तूल पकड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि नोडल अधिकारी के आश्वासन के बाद क्या जिला स्तर के तानाशाह अधिकारियों पर गाज गिरती है या फिर कर्मचारियों को 2 जून को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

छत्तीसगढ़ की ऐसी ही खोजी और सटीक खबरों के लिए पढ़ते रहिए chaturpost.com

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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