
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से बढ़ी खबर आ रही है। बिलासपुर स्थित हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के एक विवादित आदेश पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आदेश को कोर्ट ने प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण माना है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला डॉ. कुमुदिनी वाघ द्विवेदी से जुड़ा है, जो वर्तमान में सक्ती जिले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पद पर पदस्थ थीं। राज्य सरकार ने 11 जून 2026 को एक आदेश जारी कर डॉ. द्विवेदी को प्रतिनियुक्ति पर डाइट (DIET) में भेज दिया था। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ डॉ. द्विवेदी ने हाई कोर्ट की शरण ली और स्थानांतरण (Transfer) एवं प्रतिनियुक्ति आदेश को चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ (Single Bench) में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनुराग दयाल श्रीवास्तव ने कानूनी पहलुओं को मजबूती से रखा। कोर्ट के समक्ष मुख्य बिंदु ये रहे:
- नियमों का उल्लंघन: याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि किसी भी शासकीय कर्मचारी को डेपुटेशन पर भेजने से पहले उसकी अनिवार्य सहमति (Mandatory Consent) लेना आवश्यक है।
- कानूनी प्रक्रिया: बिना सहमति के जारी किया गया आदेश कानून की उचित प्रक्रिया (Due Process of Law) का सीधा उल्लंघन है।
- प्रथम दृष्टया त्रुटि: कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए माना कि सरकार का आदेश बिना उचित प्रक्रिया के जारी किया गया प्रतीत होता है।
अब क्या होगा आगे?
कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस (Notice) जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। फिलहाल 11 जून 2026 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लग गई है।
महत्वपूर्ण स्थिति: इस आदेश के बाद सक्ती जिले में अजीब स्थिति निर्मित हो गई है। क्योंकि सरकार ने बिलासपुर के डीईओ विजय तांडे का तबादला सक्ती कर दिया था, वहीं डॉ. द्विवेदी को भी पद पर बने रहने का आधार मिल गया है। अब कामकाज (Official Work) और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।






