
न्यूज डेस्क। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आई है। लंबे समय से लंबित Pay Fixation (वेतन निर्धारण) विवाद, जो विशेष रूप से MACP (संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति) और नियमित पदोन्नति (Regular Promotion) के बीच फंसा था, अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में आयोजित National Council (JCM) की 49वीं बैठक में सरकार ने इस जटिल विषय पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है।
सरकार के इस फैसले का सीधा असर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो प्रमोशन के बावजूद वित्तीय लाभ न मिलने की विसंगति (Anomalies) का सामना कर रहे थे।
JCM बैठक का बड़ा फैसला और DoPT के निर्देश
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन संख्या 3/1/2025-JCA (दिनांक 03.06.2026) के अनुसार, सरकार ने इस मामले को फिलहाल एक ‘बड़े नीतिगत बदलाव’ के रूप में चिन्हित किया है। बैठक के कार्यवृत्त (Minutes) से यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने वर्तमान में व्यापक बदलाव की मांग को स्थगित करते हुए इसे आगामी 8th CPC (आठवां केंद्रीय वेतन आयोग) के पाले में डाल दिया है।
विवाद का मूल कारण: FR-22(1)(a)(1)
यह पूरा विवाद मूल नियम FR-22(1)(a)(1) के इर्द-गिर्द घूमता है। नियम के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी उच्च जिम्मेदारी वाले पद पर पदोन्नत होता है, तो उसे एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि (Increment) मिलनी चाहिए।
हालांकि, समस्या तब आती है जब कर्मचारी को MACP के तहत पहले ही उच्च वेतन स्तर मिल चुका होता है।
- वर्तमान नियम: यदि MACP के जरिए कर्मचारी पहले ही उच्च Pay Scale में है, तो नियमित प्रमोशन पर नया वेतन निर्धारण लाभ नहीं दिया जाता।
- कर्मचारी संघ का तर्क: संघ का कहना है कि MACP केवल ‘स्टेगनेशन’ दूर करने के लिए है, जबकि प्रमोशन ‘जिम्मेदारी’ बढ़ाता है। अतः दोनों को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।
सरकार का दो-स्तरीय दृष्टिकोण (Two-Fold Strategy)
परिषद ने इस विषय पर समाधान के लिए दो स्पष्ट रास्ते तय किए हैं:
- विशिष्ट मामलों की समीक्षा: जिन कर्मचारियों को तकनीकी रूप से अत्यधिक नुकसान हो रहा है, उनके व्यक्तिगत मामलों की जांच DoPT द्वारा की जा सकती है।
- दीर्घकालिक समाधान (8th CPC): व्यापक नीतिगत बदलाव के लिए इस मुद्दे को 8th Pay Commission के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
8वें वेतन आयोग से क्या हैं उम्मीदें?
चूंकि अब इस मुद्दे को आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग के एजेंडे में शामिल करने की तैयारी है, इसलिए केंद्रीय कर्मचारियों को आने वाले समय में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग की मुख्य चुनौती ‘वेतन मैट्रिक्स’ में सुधार करना होगा ताकि Career Progression (करियर में प्रगति) के साथ मिलने वाला वित्तीय लाभ फिर से बहाल हो सके।
कर्मचारियों के लिए आगे का रास्ता
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के पास अब यह स्पष्ट लिखित अधिदेश (Mandate) है कि वे इस संरचनात्मक विसंगति को आयोग के समक्ष मजबूती से रखें। तब तक, मौजूदा प्रतिबंधात्मक ढांचा ही प्रभावी रहेगा।







