
न्यूज डेस्क। केन्द्र सरकार देश के नौकरीपेशा और असंगठित क्षेत्र (unorganised sector) के श्रमिकों के लिए एक क्रांतिकारी सामाजिक सुरक्षा योजना (Social Security Scheme) पर काम कर रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO अपने तीसरे चरण के सुधारों (EPFO 3.0 Reforms) के तहत एक नई अंशदायी पेंशन योजना (Contributory Pension Scheme) लाने की तैयारी में है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह जोखिम मुक्त (Risk-Free) होगी और इसमें निवेशकों को वास्तविक रिटर्न (Real Returns) मिलेगा।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि यह नई योजना मौजूदा कर्मचारी पेंशन योजना (Employees’ Pension Scheme – EPS) से बाहर रह गए लोगों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बुढ़ापे में एक बड़ा वित्तीय सहारा देगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि सरकार का यह नया मास्टरप्लान क्या है और यह मौजूदा नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System – NPS) से कितना अलग और बेहतर होने वाला है।
क्या है टारगेट रिटायरमेंट सम (Target Retirement Sum – TRS)?
इस नई योजना के तहत हर सब्सक्राइबर का एक व्यक्तिगत पेंशन खाता (Individual Pension Account) खोला जाएगा। इस प्रणाली का सबसे मुख्य आकर्षण ‘टार्गेट रिटायरमेंट सम’ (Target Retirement Sum – TRS) है। यह कोई फिक्स राशि नहीं होगी, बल्कि सिस्टम मेंबर के चुने हुए पेंशन लक्ष्य (Pension Goal) और उसकी रिटायरमेंट की उम्र के आधार पर डायनेमिक तरीके से टीआरएस (TRS) की गणना करेगा।
खाताधारकों को एक पर्सनलाइज्ड डैशबोर्ड (Personalized Dashboard) मिलेगा। इस डिजिटल डैशबोर्ड पर कर्मचारी अपने कुल योगदान, रियल-टाइम कॉर्पस स्टेटस (Real-time Corpus Status) और अपने तय किए गए टीआरएस (TRS) की प्रगति को लाइव देख सकेंगे। सिस्टम खुद यह प्रोजेक्ट करेगा कि घोषित टीआरएस को हासिल करने के लिए कर्मचारी को किस अंतराल पर कितना अंशदान (Required Contribution) करना होगा।
55 साल की उम्र में मिलेगी बड़ी आजादी: PF की तरह जमा होगा पैसा
EPFO के इस नए प्रस्ताव में कर्मचारियों को उम्र के एक पड़ाव पर आकर बेहद खास वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Flexibility) मिलने वाली है।
- 55 वर्ष की उम्र में फैसला: जब कर्मचारी 55 वर्ष की आयु पार कर लेगा, तो उसे यह तय करने की आजादी होगी कि वह अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स (Retirement Savings) का इस्तेमाल किस तरह करना चाहता है।
- PF की तरह संचय (Accumulation): 55 साल की उम्र तक यह खाता पूरी तरह से प्रोविडेंट फंड (Provident Fund – PF) की तरह काम करेगा, जिसमें आपका पैसा लगातार जमा होता रहेगा और उस पर ब्याज जुड़ता जाएगा।
- 60 की उम्र में पेंशन कन्वर्जन: जब कर्मचारी 60 वर्ष का हो जाएगा, तब प्रस्तावित ‘टारगेट रिटायरमेंट सम’ (TRS) को उस समय बाजार में चल रही एन्युटी (Annuity) और ब्याज दरों के आधार पर पेंशन में बदल दिया जाएगा।
मल्टीपल सोर्सेज से आएगा पैसा: गीग वर्कर्स को भी मिलेगा सुरक्षा कवच
पारंपरिक पेंशन योजनाओं (Traditional Pension Schemes) में आमतौर पर केवल कर्मचारी और उसका नियोक्ता (Employer) ही मिलकर अंशदान करते हैं। इसके विपरीत (In contrast), सरकार की इस नई योजना का ढांचा बेहद आधुनिक, डिजिटल-फ्रेंडली और लचीला (Flexible structure) बनाया गया है। इसमें देश के उन करोड़ों असंगठित कामगारों का विशेष ध्यान रखा गया है जिनकी कोई निश्चित मासिक आय नहीं होती है। परिणामस्वरूप (Consequently), इस योजना में कई अलग-अलग स्रोतों से योगदान (Multi-Source Contribution) स्वीकार किया जाएगा, ताकि फंड लगातार बढ़ता रहे।
💸 अंशदान के 5 बड़े और अनोखे रास्ते (Co-contribution Models):
- 1. स्वयं श्रमिक (Workers Share): कर्मचारी अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार जब चाहे, जितनी चाहे राशि खुद इस खाते में स्वैच्छिक योगदान (Voluntary Contribution) के रूप में जमा कर सकेंगे।
- 2. नियोक्ता का हिस्सा (Employers Contribution): औपचारिक क्षेत्र (Formal Sector) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए उनकी कंपनियों द्वारा किया जाने वाला नियमित अंशदान पहले की तरह ही जारी रहेगा।
- 3. सरकारी सह-योगदान (Government Co-contribution): कम वेतन पाने वाले या निचले वेतन वर्ग (Lower wage segment) के श्रमिकों की मदद के लिए सरकार खुद अपनी तरफ से वित्तीय सहायता के तौर पर इस खाते में पैसा डालेगी।
- 4. एग्रीगेटर्स का योगदान (Aggregators share): जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले गीग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Gig and Platform Workers) के लिए उनके एग्रीगेटर्स को इस फंड में अनिवार्य योगदान करना होगा। सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत ये कंपनियां अपने सालाना टर्नओवर का 1% से 2% हिस्सा सामाजिक सुरक्षा के लिए देंगी।
- 5. सीएसआर और थर्ड-पार्टी फंड (CSR & Third-Party Funds): देश में पहली बार ऐसा डिजिटल सिस्टम बन रहा है जहां एनजीओ (NGOs), बड़े दानदाता संस्थान, कोई व्यक्तिगत शुभचिंतक या कॉर्पोरेट घराने अपनी सीएसआर गतिविधि के तहत इन गरीब श्रमिकों के यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) में सीधे फंड ट्रांसफर कर सकेंगे। सिस्टम इसके लिए एक ऊपरी सीमा (Upper Limit) भी तय करेगा।
इसके अलावा (Furthermore), यह बहु-स्तरीय मॉडल (Multi-layered model) यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में देश का कोई भी डिलीवरी पार्टनर, फ्रीलांसर, कैब驱动र, कंस्ट्रक्शन वर्कर या छोटा दिहाड़ी मजदूर बुढ़ापे में बेसहारा न रहे। संक्षेप में कहें तो (To sum up), सरकार का यह लचीला को-कंट्रीब्यूशन मॉडल देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी एक मजबूत और सुरक्षित सामाजिक सुरक्षा कवच (Social Security Net) प्रदान करने जा रहा है।
NPS से कितनी अलग और क्यों बेहतर है यह योजना?
जब सरकारी अधिकारियों से पूछा गया कि क्या यह योजना नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System – NPS) जैसी ही होगी, तो उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण अंतर बताया। अधिकारी के मुताबिक:
“NPS पूरी तरह से एन्युटी पर आधारित (Purely Annuity Based) है, जबकि सरकार की यह प्रस्तावित पेंशन योजना अधिक लचीली, जोखिम मुक्त और वास्तविक रिटर्न पर आधारित होगी, न कि काल्पनिक रिटर्न (Notional Returns) पर।”
सरकार इसे पीएफ (PF) की तरह बनाना चाहती है, जहां रिटायरमेंट के बाद केवल आपका योगदान रुकता है, पैसा सुरक्षित रहता है। इसके बाद इसे आपकी जरूरत के हिसाब से सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (Systematic Withdrawal Plan – SWP) में बदल दिया जाएगा।
महंगाई को मात देगा ‘ड्रॉडाउन’ का विकल्प: खुद तय करें अपनी पेंशन
इस योजना में पेंशन पाने के दो बेहद शानदार विकल्प सोचे जा रहे हैं, जो इसे भारत की सबसे अनोखी योजना बना देंगे:
- ब्याज के बराबर पेंशन (Corpus Protection): मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के वक्त 1 करोड़ रुपये का फंड जमा है और सरकार ने 8% ब्याज घोषित किया है। इस हिसाब से सालाना 8 लाख रुपये का ब्याज बनता है। अगर आप इसे 12 महीनों में बांटते हैं, तो आपको हर महीने लगभग 66,000 रुपये पेंशन मिलेगी और आपका 1 करोड़ रुपये का मूलधन (Principal Corpus) हमेशा सुरक्षित रहेगा।
- शुरुआत में अधिक पेंशन (Principal Drawdown): यदि आपको शुरुआती सालों में ज्यादा पैसों की जरूरत है, तो आप अपने मूलधन से भी निकासी (Drawdown) कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपको लगता है कि अगले 20 सालों तक आपको ज्यादा पेंशन चाहिए, तो आप ड्रॉडाउन बढ़ा सकते हैं।
- इन्फ्लेशन लिंक्ड प्लान (Inflation-Linked Plan): यदि आप शुरुआत में कम पैसा निकालते हैं, तो बचा हुआ ब्याज आपके मूलधन में जुड़ता जाएगा। इससे उम्र बढ़ने के साथ-साथ आपकी मासिक पेंशन राशि भी बढ़ती जाएगी, जो बुढ़ापे में बढ़ती महंगाई (Inflation) से लड़ने में सबसे मददगार साबित होगी।
सिंगापुर के ‘सेंट्रल प्रोविडेंट फंड’ (CPF) मॉडल का अध्ययन
भारत सरकार इस योजना को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए दुनिया के बेहतरीन पेंशन मॉडल्स का अध्ययन कर रही है। विशेष रूप से सिंगापुर के सेंट्रल प्रोविडेंट फंड (Central Provident Fund – CPF) मॉडल की बारीकियों को देखा जा रहा है।
सिंगापुर का सीपीएफ मॉडल एक डिफर्ड एन्युटी स्कीम (Deferred Annuity Scheme) है, जो न केवल रिटायरमेंट बल्कि घर खरीदने और स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare) के लिए भी बचत करने की अनुमति देता है। वहां नागरिकों को सरकार, नियोक्ता और परिवार के सदस्यों से भी सहयोग मिलता है। इसके अलावा, वहां 55 वर्ष से अधिक उम्र के सदस्यों को 6% तक का सुनिश्चित ब्याज दिया जाता है। भारत भी अपने नए सिस्टम में ऐसी ही कुछ खूबियों को शामिल करना चाहता है।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का नया अवतार: वन-टू-मेनी मैपिंग
EPFO अगले 5 वर्षों में लगभग 2.5 करोड़ गीग वर्कर्स और निर्माण कार्यों में लगे भवन निर्माताओं (BOCW) को इस सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की उम्मीद कर रहा है। इसके लिए तकनीक को पूरी तरह अपग्रेड किया जा रहा है और कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (Core Banking Solution – CBS) को नया रूप दिया जा रहा है।
इस नई व्यवस्था में ‘वन-टू-मेनी मैपिंग’ (One-to-Many Mapping) तकनीक लागू होगी। यानी, यदि कोई डिलीवरी बॉय या फ्रीलांसर एक ही समय में कई कंपनियों या एग्रीगेटर्स के साथ काम कर रहा है, तो उसका UAN (Universal Account Number) एक ही रहेगा, लेकिन वह कई नियोक्ताओं के साथ लिंक हो सकेगा। इससे उसके खाते में अलग-अलग जगहों से आने वाला पूरा पीएफ और पेंशन योगदान एक ही जगह दिखेगा, जबकि नियोक्ता-वार ब्रेकडाउन भी सुरक्षित रहेगा।
पारिवारिक सुरक्षा: संकट में काम आएगा ‘फैमिली बेनिफिट फंड’
यह योजना केवल कर्मचारी के जीवित रहने तक सीमित नहीं है। इसमें कर्मचारी के परिवार की सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया है। योजना के अंतर्गत पति/पत्नी (Spouse), बच्चों और अनाथ बच्चों के लिए पारिवारिक और उत्तरजीवी पेंशन (Family and Survivor Pensions) का प्रावधान है।
इसके लिए एक अलग ‘फैमिली बेनिफिट फंड’ (Family Benefit Fund) बनाया जाएगा, जिसे पूरी तरह से बीमांकिक सिद्धांतों (Actuarial Principles) के आधार पर प्रबंधित किया जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि EPF, GPF और अन्य प्रोविडेंट फंड के मौजूदा सदस्यों को भी अपने बैलेंस को इस नई पेंशन पहल में ट्रांसफर करने की अनुमति दी जा सकती है, ताकि उनका बुढ़ापा पूरी तरह सुरक्षित हो सके।
श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) जल्द ही इस महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजना को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी के नाम को अंतिम रूप देगा। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, बस अब केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी का इंतजार है।







