Abujhmad रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को रायपुर आ रहे हैं। शाह का विशेष विमान से दोपहर दो बजे रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। पहले दिन रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद अगले दिन बस्तर जाएंगे। शाह सोमवार को अबूझमाड़ के ग्रामीणों से सीधा संवाद भी करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री शाह नवा रायपुर में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) और सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (CFSL) का शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही शाह NFSU रायपुर के अस्थाई परिसर का ई-उद्घाटन भी करेंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के बाद शाह नवा रायपुर स्थित होटल पहुंचेंगे, जहां वे नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक लेंगे। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के साथ ही सीमावर्ती नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी और एडीजी शामिल होंगे। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफसर भी रहेंगे। शाम छह बजे वामपंथी उग्रवाद पर सुरक्षा की समीक्षा बैठक लेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री 23 जून को बस्तर के दौरे पर रहेंगे। जहां वे अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम में दोपहर 12 बजे होगी। दोपहर एक बजे शाह नारायणपुर के इरकाभट्टी स्थित बीएसएफ के कैंप में जाएंगे। जहां जवानों के साथ्ज्ञ दोपहर का भोजन करने के साथ ही उनके साथ संवाद भी करेंगे।
अबूझमाड़ पहुंचने वालें केंद्रीय शाह देश के पहले गृह मंत्री होंगे। शाह 23 जून को नारायणपुर जिला में आने वाले अबूझामड़ के गांवों का दौरा करेंगे और वहां के लोगों से बात करेंगे। बता दें कि अबूझमाड़ को नक्सलियों की अघोषित राजधानी कहा जाता है। इस क्षेत्र में अब तक प्रदेश का कोई मंत्री भी दौरा नहीं कर पाया है।
अबूझमाड़ में अबूझ का अर्थ अनजान या जिसे समझा न जा सके होता है। वहीं माड़ का अर्थ जंगल होता है। आजादी के 78 साल बाद भी अबूझामड़ देश और दुनिया के लिए अबूझ ही है।
करीब चार हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र का अब तक राजस्व सर्वे नहीं हो पाया। यह क्षेत्र अब भी सरकारी तंत्र की पहुंच से दूर है। पूरा क्षेत्र दुर्गम पहाड़ी और घने वन का क्षेत्र है। वहां कई तरह के हिंसक वन्य जीव रहते हैं।
घने वनों के बीच वहां संरक्षित जनजाति के लोग रहे हैं। इसी वजह से 1980 में इस क्षेत्र में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दिया गया था, जो 2009 तक लागू रहा। माना जाता है कि इसी कारण पूरा इलाका नक्सलियों का गढ़ बन गया। इस क्षेत्र का विकास और सर्वे नहीं हो पाने की सबसे बड़ी वजह नक्सलवाद है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नक्सलियों ने इस अपना गढ़ बना रखा था। इसे नक्सलियों की अघोषित राजधानी भी कहा जाता है था।
अबूझमाड़ छत्तीगसढ़ के तीन जिलों नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा के साथ महाराष्ट्र और अविभाजित आंध्रप्रदेश् से लगा हुआ है।