Amit Shah न्यूज डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। शाह ने कहा कि हथियार छोडऩे वालों के लिए रेड-कार्पेट है, लेकिन निर्दोष आदिवासियों को नक्सली हिंसा से बचाना सरकार का धर्म है। नई दिल्ली में ‘भारत मंथन-2025 नक्सल मुक्त भारत, पीएम मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का अंतके समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नक्सलियों के सीज फायर के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। बता दें कि शाह का 4 अक्टूबर को बस्तर दौरा प्रस्तावित है।
अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च, 2026 तक भारत नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। जब तक नक्सलवाद का वैचारिक पोषण, कानूनी समर्थन और वित्तीय पोषण करने वाले लोगों को समाज समझ नहीं लेता, तब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई समाप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की सुरक्षा हमेशा से हमारी विचारधारा का प्रमुख अंग रही है। हमारी पार्टी के मूल उद्देश्यों में तीन चीज़ें बहुत प्रमुख थीं- देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के सभी अंगों का पुनरुत्थान। उन्होंने कहा कि 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी और आज लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री मोदी जी के ही नेतृत्व में हमारी सरकार है।
अमित शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता संभाली,तब देश की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से तीन महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट- जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और वामपंथी कॉरिडोर, ने देश की आंतरिक सुरक्षा को छिन्न-भिन्न करके रखा था। उन्होंने कहा कि लगभग 4-5 दशक से हजारों लोग इन तीनों जगहों पर पनपी और फैली अशांति के कारण जान गंवा चुके थे, संपत्ति का बहुत नुकसान हुआ था, देश के बजट का बहुत बड़ा हिस्सा गरीबों के विकास की जगह इन हॉटस्पॉट को संभालने में जाता था और सुरक्षा बलों की भी अपार जानहानि हुई थी। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही इन तीनों हॉटस्पॉट पर ध्यान केन्द्रित किया गया और दीर्घकालीन स्पष्ट रणनीति के आधार पर काम हुआ।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के 10 साल में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लगभग 70 के दशक की शुरूआत में नक्सलवादी विचार और हथियारी विद्रोह की शुरूआत हुई। उन्होंने कहा कि 1971 में स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे ज़्यादा 3620 हिंसक घटनाएं हुईं और इसके बाद 80 के दशक में पीपल्स वॉर ग्रुप ने महाराष्ट्र, संयुक्त आंध्र प्रदेश-तेलंगाना,संयुक्त मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, संयुक्त झारखंड-बिहार और केरल तक इसका विस्तार किया। उन्होंने कहा कि 80 के दशक के बाद वामपंथी गुटों ने एक दूसरे में विलय की शुरूआत की और 2004 में प्रमुख सीपीआई (माओवादी) गुट का गठन हुआ और नक्सली हिंसा ने बहुत गंभीर स्वरूप ले लिया।
शाह कहा कि पशुपति से तिरुपति कॉरिडोर को रेड कॉरिडोर के रूप में जाना जाता था। देश के भू-भाग का 17 प्रतिशत हिस्सा रेड कॉरिडोर में समाहित था और इस समस्या से 12 करोड़ की आबादी प्रभावित थी। उन्होंने कहा कि उस वक्त की आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा नक्सलवाद का दंश झेलकर अपना जीवन बिता रहा था। उसकी तुलना में दो अन्य हॉटस्पॉट – कश्मीर में 1 प्रतिशत भूभाग आतंकवाद औऱ पूर्वोत्तर में देश का 3.3 प्रतिशत भूभाग अशांति से ग्रस्त था। जब तक वामपंथी दल बंगाल में सत्ता में नहीं आए, तब तक वहां नक्सलवाद पनपता रहा, लेकिन जैसे ही उनके वहां सत्ता में आने की सुगबुगाहट हुई, नक्सलवाद वहां समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि यह संयोग हमें नक्सलवाद का कारण बताता है। जब 2014 में मोदी जी प्रधानमंत्री बने,तब मोदी सरकार ने संवाद, सुरक्षा और समन्वय के तीनों पहलुओं पर काम करने की शुरूआत की और अब इसका नतीजा है कि 31 मार्च, 2026 को इस देश से हथियारी नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि पहली बार भारत सरकार ने बिना किसी कन्फ्यूजऩ के नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों को हमने खुली छूट दी, इंटेलीजेंस, इन्फॉर्मेशन शेयरिंग और ऑपरेशन में कोऑर्डिनेशन के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों के बीच एक व्यावहारिक सेतु बनाया गया। उन्होंने कहा कि आम्र्स और एम्युनिशन की सप्लाई पर नकेल कसी गई और 2019 के बाद उनकी सप्लाई पर लगभग 90 प्रतिशत से अधिक कटौती करने में हमें सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों का वित्त पोषण करने वालों पर एनआईए और ईडी का उपयोग कर हमने नकेल कसी है, उनका अर्बन नक्सल सपोर्ट, लीगल सहायता औऱ मीडिया नरेटिव गढऩे के सामने भी हम लड़े हैं।
शाह ने कहा कि हमने सेंट्रल कमिटी के मेंबर्स पर लक्षित तरीकेसे कार्रवाई की और 18 से अधिक सेंट्रल कमिटी के मेंबर 19 अगस्त से आज तक न्यूट्रलाइज़ किए गए। सुरक्षा वैक्यूम को हमने भरनेका काम किया और टारगेटेड ऑपरेशन जैसे कि ऑपरेशन ऑक्टोपस और ऑपरेशन डबल बुल किए गए। उन्होंने कहा कि DRG, STF, CRPF और कोबरा की संयुक्त ट्रेनिंग की भी हमने शुरूआत की और चारों दल मिलकर अब अभियान चलाते हैं और उसका चेन ऑफ कमांड भी अब स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि एकीकृत प्रशिक्षण से हमारी सफलता में बहुत अंतर आया है। इसके साथ-साथ फॉरेंसिक जांच शुरू की गई, लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम उपलब्ध कराया गया, मोबाइल फोन की गतिविधियों को राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया गया, साइंटिफिक कॉल लॉग्स एनालिसिस के सॉफ्टवेयर बने औऱ सोशल मीडिया एनालिसिस से भी उनके छुपे हुए सपोर्टर्स को ढूंढने का काम हुआ। इसके द्वारा अभियान में न सिर्फ तेज़ी आई, बल्कि वेसफल औऱ परिणामलक्षी भी हुए।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2019 के बाद हमने राज्यों के क्षमता निर्माण पर भी थ्रस्ट दिया। लगभग 3331 करोड़ रूपए जारी किए गए, जो लगभग 155 प्रतिशत की वृद्धिदर्शाता है। उन्होंने कहा कि उसके माध्यम से फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बढ़ाए गए, लगभग 1741 करोड़ रूपए इस पर खर्च हुए। पिछले 6 साल में 336 नए सीएपीएफ के कैंप बनाकर सुरक्षा के वैक्यूम को भरने का काम मोदी सरकार ने किया। इसका परिणाम हुआ- 2004 -14 के मुकाबले 2014-24 में सुरक्षाबलों की मृत्यु में 73 प्रतिशत की कमी आई औऱ नागरिकों की मृत्यु में 70 प्रतिशत कमी आई।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमें सफलता नहीं मिलती थी, क्योंकि विपक्ष की सरकार थी। 2024 में वहां हमारी सरकार बनी और 2024 में एक साल के इतिहास के सबसे अधिक 290 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज़ करने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि हम किसी को नहीं मारना चाहते, क्योंकि 290 न्यूट्रलाइज़्ड नक्सलियों के मुकाबले 1090 गिरफ्तार किए और 881 ने सरेंडर किया। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि सरकार का अप्रोच क्या है और हम पूरा प्रयास करते हैं कि नक्सली को सरेंडर कराने या अरेस्ट करने का पूरा मौका दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लेकिन जब वे हाथ में हथियार लेकर भारत के निर्दोष नागरिकों को मारने निकलते हैं तो सुरक्षाबलों के पास कोई और चारा नहीं होता और उन्हें गोली का जवाब गोली से ही देना होता है। उन्होंने कहा कि 2025 में अब तक 270 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है, 680 गिरफ्तार किए गए हैं और 1225 ने आत्मसमर्पण किया है। दोनों वर्षों में आत्मसमर्पण और अरेस्ट की संख्या न्यूट्रलाइज़्ड की संख्या से अधिक है और आत्मसमर्पण की संख्या बताती है कि नक्सलियों का समय अब बहुत कम बचा है।
अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर एक विकट पहाड़ी पर बहुत बड़ा कैंप बनाया था, जहां बहुत सारे हथियार थे, दो साल का राशन था, हथियार और आईईडी बनाने की फैक्ट्रियां थी और वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि 23 मई 2025 को उनके इस कैंप को ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में नष्ट कर दिया गया औऱ 27 हार्डकोर नक्सली मारे गए, बीजापुर में 24 हार्डकोर नक्सली मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में बचे-खुचे नक्सलियों की रीढ़ टूट गई है। शाह ने कहा कि जो नक्सली न्यूट्रलाइज़्ड किए गए, उनमें 1 जोनल कमिटी मेंबर, 5 सबज़ोनल कमिटी मेंबर, 2 स्टेट कमिटी मेंबर, 31 डिविजऩल कमिटी मेंबर और 59 एरिया कमिटी मेंबर 2024 में मारे गए।
। 2014 में 126 नक्सलाइट ज़िले थे, अब 18 ज़िले ही बचे
केंद्रीय गृह केंद्रीयमंत्री ने कहा कि 1960 से 2014 तक कुल 66 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन थे और मोदी सरकार के 10 साल में नए 555 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाने का काम हुआ। 2014 में 126 नक्सलाइट ज़िले थे, अब 18 नक्सलाइट ज़िले ही बचे हैं। मोस्ट अफेक्टेड ज़िले 35 से घटकर 6 बचे हैं। जिनपुलिस स्टेशन मेंनक्सलघटनाएँदर्जहोतीथीं, वे लगभग 2000 थे, अब 151 रह गए हैं और इनमें भी 41 नए बनाए गए पुलिस स्टेशन हैं। पिछले 6 साल में 331 सुरक्षा कैंप बनाए गए और नाइट लैंडिंग के लिए 68 हैलीपैड बनाए गए हैं। हमारे सीआरपीएफ के जवानों के लिए हमने 68 नाइट लैंडिंग हैलीपैड बनाए हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की आय़ कम करने के लिए एनआईए, ईडी और राज्य सरकारों ने करोडों रूपए की संपत्तियां ज़ब्त की हैं। गृह मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के समन्वय के लिए भी उनके स्तर पर मुख्यमंत्रियों के साथ 12 बैठकें हुई हैं और अकेले छत्तीसगढ़ में 8 बैठकें हुई हैं। नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए ल्यूक्रेटिव पैकेज छत्तीसगढ़ सरकार लाई है। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी क्षेत्र में विकास के लिए भी कई काम किए गए हैं।
अमित शाह ने कहा कि जो लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि वामपंथी उग्रवाद का मूल कारण विकास है, वे देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 करोड़ गरीबों के लिए प्रधानमंत्री मोदी अनेक योजनाएं लाए हैं और नक्सलवादी क्षेत्र में कौन इन योजनाओं को नहीं पहुंचने देता? उन्होंने कहा कि सुकमा या बीजापुर में स्कूल नहीं पहुंचा तो उसका दोषी कौन है? उन्होंने कहा कि वामपंथी क्षेत्र में सड़कें क्यों नहीं बन सकीं, क्योंकि नक्सलियों ने कॉट्रैक्टर्स की हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि न तो नक्सलियों के समर्थक आदिवासियों का विकास चाहते और न ही उनके मन में उनकी चिंता है, बल्कि उन्हें दुनियाभर में रिजेक्ट होती अपनी विचारधारा को ज़िदा रखने की चिंता है। उन्होंने कहा कि विकास न पहुंचने का एकमात्र कारण वामपंथी विचारधारा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत में मोदी सरकार है औऱ यहां यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने पहला निशाना संविधान और फिर न्यायिक व्यवस्था को बनाया। संवैधानिक वैक्यूम खड़ा किया और फिर स्टेट की कल्पना को निशाना बनाया और स्टेट का वैक्यूम खड़ा किया। जो भी उनके साथ नहीं जुड़े, उन्हें स्टेट का इन्फॉर्मर बनाकर जनता की अदालत में फांसी की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि इन्होंने पैरेलल सरकार बनाई। शाह ने कहा कि देश के कल्याण के लिए अपनी विचारधारा से उपर उठने की ज़रूरत है। जहानाबाद में लगभग 1000 नक्सलियों ने 13 नवंबर 2006 को जहानाबाद को 7 घंटे अपने कब्ज़े में रखा। उन्होंने कहा कि 2006 में हमारी सरकार नहीं थी लेकिन तब भी हम इसकी निंदा करते थे क्योंकि यह सवाल देश का है। गवर्नेंस के वैक्यूम के कारण ही वहां विकास, साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं।
अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों के साथ कोई सीजफ़ायर नहीं होगा। अगर उन्हें सरेंडर करना है, तो सीजफ़ायर करने की जऱरूरत ही नहीं है, उन्हें हथियार डाल देने चाहिए और पुलिस एक भी गोली नहीं चलाएगी और उन्हें रिस्टेब्लिश करेगी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ब्लैक फ़ॉरेस्ट होते ही वामपंथीराजनीतिक दल ऑपरेशनरुकवाने केलिएपत्रपरपत्रलिखनेलगे औरनक्सलियों के समर्थकों की सारी छद्म सिम्पैथी एक्सपोज हो गई।
केंद्रीय गृह केंद्रीयमंत्री ने कहा कि 2014-24 के दौरान वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में 12 हज़ार किलोमीटर सड़कें बनी हैं, 17,589 किलोमीटर सड़कों के लिए बजट स्वीकृत हुआ, 6300 करोड़ रूपए की लागत से 5000 मोबाइल टॉवर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 1007 बैंक ब्रांचेज खोली गई, 937 एटीएम लगाए गए, 37,850 बैंकिग कॉरेस्पॉडेंट्स बनाए गए, 5899 डाकघर खोले गए, 850 स्कूल और 186 अच्छे स्वास्थ्य केन्द खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नियद नेल्लानार योजना तहत आयुष्मान भारत कार्ड, आधार कार्ड, वोटिंग कार्ड, स्कूल बनाना, राशन दुकान, आंगनवाड़ी स्वीकृत करने के काम में लगी है।