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Ayurveda आयुर्वेद बना ‘संजीवनी’: छत्‍तीसगढ़ में मोटापा, शुगर और बीपी से मिली मुक्ति; बिना सर्जरी ठीक हुआ सर्वाइकल, जानें 6 प्रेरक कहानियां

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Ayurveda  रायगढ़। भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती जीवनशैली के बीच छत्तीसगढ़ का आयुष विभाग लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। रायगढ़ जिले के लोईग स्थित आयुष अस्पताल में जटिल बीमारियों का निःशुल्क आयुर्वेदिक उपचार न केवल मरीजों को स्वस्थ कर रहा है, बल्कि उन्हें नई जिंदगी भी दे रहा है।

प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी के मार्गदर्शन में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां एलोपैथी से निराश हो चुके मरीजों को आयुर्वेद ने पूरी तरह ठीक कर दिया।

आयुर्वेद बना संजीवनी: रायगढ़ में मोटापा, शुगर और बीपी से मिली राहत; 6 मरीजों की प्रेरक कहानियां

रायगढ़/रायपुर: बदलते दौर की लाइफस्टाइल बीमारियों जैसे मधुमेह, बीपी और मोटापे के बीच रायगढ़ का आयुष अस्पताल एक वरदान साबित हो रहा है। यहाँ डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी के नेतृत्व में मरीजों को बिना किसी दुष्प्रभाव के नई जिंदगी मिल रही है।

1. शुगर और बीपी कंट्रोल

मरीज: लुवा सारथी (78 वर्ष)

शुगर 390 से घटकर 170 पर आई। दो महीने से एलोपैथी दवाएं बंद।

2. बिना सर्जरी सर्वाइकल ठीक

मरीज: गनपत उरांव (38 वर्ष)

सर्जरी की सलाह दी गई थी, लेकिन आयुर्वेदिक पंचकर्म से 70% राहत मिली।

3. वेट लॉस (मोटापा)

मरीज: ममता जोशी (43 वर्ष)

वजन 90 किलो से घटकर 76 किलो हुआ। हीमोग्लोबिन में भी सुधार।

आयुर्वेद: सिर्फ इलाज नहीं, जीवनशैली है

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी ने बताया कि अस्पताल में औषधियों के साथ-साथ आहार-विहार और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहाँ उपलब्ध सभी उपचार छत्तीसगढ़ शासन के आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क प्रदान किए जा रहे हैं।

“आयुर्वेद जड़ से बीमारी को खत्म करने की ताकत रखता है। नियमित परामर्श और संयमित जीवन से जटिल रोग भी ठीक हो सकते हैं।” – डॉ. माकेश्वरी जोशी

इन बीमारियों में भी मिल रही राहत:

  • माइग्रेन और तनाव
  • पुरानी एलर्जी
  • बालों का झड़ना
  • पाचन संबंधी समस्याएं
  • शारीरिक कमजोरी
  • क्रॉनिक सर्दी

रायगढ़ आयुष अस्पताल का यह प्रयास उन लोगों के लिए वरदान है जो महंगे इलाज से बचना चाहते हैं।

इन 6 मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ आयुर्वेद

* बिना सर्जरी ठीक हुआ सर्वाइकल: गोवर्धनपुर के 38 वर्षीय गनपत उरांव सर्वाइकल पेन और स्पोंडिलाइटिस से इतने परेशान थे कि डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी थी। लेकिन पंचकर्म और आयुर्वेद ने उन्हें 70% तक राहत दी और अब वे सामान्य जीवन जी रहे हैं।

* शुगर और बीपी पर नियंत्रण: 78 वर्षीय लुवा सारथी का शुगर लेवल 390 तक पहुंच गया था। आयुर्वेद के मात्र कुछ महीनों के उपचार से उनका शुगर अब 170-180 और बीपी पूरी तरह नियंत्रित है। उन्होंने एलोपैथी दवाएं तक छोड़ दी हैं।

* मोटापा और एनीमिया से छुटकारा: 43 वर्षीय ममता जोशी का वजन 90 किलो से घटकर 76 किलो हो गया। साथ ही उनका हीमोग्लोबिन बढ़ा और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से भी मुक्ति मिली।

* वजन बढ़ाने में सफलता: रेगड़ा के यासिम हुसैन का वजन 49 किलो से बढ़कर 60 किलो हो गया, वहीं बंटी मेहर ने भी 2 महीने में 8 किलो वजन बढ़ाकर अपनी शारीरिक कमजोरी दूर की।

* माइग्रेन और एलर्जी का अंत: पिछले 9 वर्षों से माइग्रेन और क्रॉनिक सर्दी से जूझ रहे बी. डड़सेना को आयुर्वेदिक उपचार से 70% तक सुधार महसूस हुआ है।

डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी कहती हैं: “आयुर्वेद केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि आहार-विहार और दिनचर्या सही हो, तो जटिल से जटिल रोगों को बिना किसी दुष्प्रभाव के जड़ से खत्म किया जा सकता है।”

क्यों खास है रायगढ़ का आयुष केंद्र?

यहाँ मरीजों को केवल दवाएं ही नहीं दी जातीं, बल्कि पंचकर्म, संतुलित आहार और औषधियों के मिश्रण से उपचार किया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि शासन की योजना के तहत यह पूरा इलाज पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ा सहारा मिल रहा है।

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