Bageshwar Dham रायपुर। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हैं। रविवार को उनके प्रवास का दूसरा दिन था। उन्होंने आज एक प्रेसवार्ता को संबोधित किया।
इस दौरान पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गोमाता की सुरक्षा, सनातन संस्कृति, शिक्षा और समाज के उत्थान को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उन्होंने कहा कि आज समाज की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि अमीर व्यक्ति गरीब का सहयोग नहीं कर रहा। जाति और ऊंच-नीच के मुद्दों में उलझाकर समाज को भटकाया जा रहा है, जबकि हिंदू-हिंदू भाई-भाई का विचार ही सनातन की शक्ति है।
छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही गोमाताओं की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए बागेश्वर धाम वाले पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अगर राज्य सरकार हर तहसील स्तर पर 5000-5000 गोधाम बनवा दें तो यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शुरुआत सिर्फ चार तहसीलों से की जाए तो 20 हजार गोधाम बन जाएंगे और इससे गोमाता सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गोधाम में गायों के रहने, खाने और चारे-पानी की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बच्चों को रामचरितमानस और भगवद गीता का अध्ययन अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिए। हर भारतवासी को प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे का सनातन ट्यूशन लेना चाहिए, जिससे बच्चों के संस्कार और संस्कृति दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में नीति बनानी चाहिए और अगर सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो कम से कम बच्चों को इस अध्ययन के लिए प्रोत्साहित जरूर करे।
धर्मांतरण के विषय पर उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम का मंच खुला है और जो लोग अपना धर्म छोड़ चुके हैं, वे 5 से 8 अक्टूबर के बीच वापस लौट सकते हैं। भूत-प्रेत के सवाल पर उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में 8 देशों की यात्रा की और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इस विषय पर शोध प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि भारत में भी इस विषय पर पीएचडी करने की योजना है, ताकि विदेशों में भी इन शक्तियों को समझा और नियंत्रित किया जा सके।
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्तीसगढ़ को सनातन का अद्भुत प्रदेश बताते हुए कहा कि यहां मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी और मां महामाया जैसी देवियों की असीम कृपा रही है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के आध्यात्मिक हृदय स्थल के रूप में जाना जाता है और भगवान बुद्ध जैसे महापुरुषों के जन्म से लेकर ज्ञान प्राप्ति तक में भारत की भूमिका सर्वोच्च रही है। उन्होंने घोषणा की कि 7 से 16 नवंबर तक वे फिर रायपुर में कथा करने आ रहे हैं और अगर गुरु की कृपा रही तो दो दिन का दिव्य दरबार भी आयोजित किया जाएगा।