रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के विकास के लिए एक क्रांतिकारी विजन पेश किया है, जिसे ‘Bastar 2.0 5-S Formula’ नाम दिया गया है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन इलाकों को मुख्यधारा (Mainstream) से जोड़ने का एक ठोस ब्लूप्रिंट (Blueprint) है, जो पिछले कई दशकों से विकास की राह देख रहे थे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बस्तर की समस्याओं का समाधान अब केवल सुरक्षा से नहीं, बल्कि सर्वांगीण विकास (All-round Development) से होगा।
क्या है Bastar 2.0 का 5-S फार्मूला? (The Core Pillars)
मुख्यमंत्री साय के इस Strategy में पांच मुख्य स्तंभ (Pillars) शामिल हैं, जो बस्तर की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को मजबूती देंगे:
- 1. Saturation (संतृप्ति): सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव में बुनियादी सुविधाओं की 100% पहुंच हो। बिजली, पानी और राशन कार्ड जैसी सुविधाएं हर घर तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचेंगी।
- 2. Connect (संपर्क): कटे हुए इलाकों को सड़कों और इंटरनेट (Digital Connectivity) से जोड़ना प्राथमिकता है। जब गांव शहर से जुड़ेंगे, तभी विकास का पहिया घूमेगा।
- 3. Facilitate (सुविधा): शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम बनाना। दूरदराज के इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट और नए पोटा केबिन स्कूल इस कड़ी का हिस्सा हैं।
- 4. Empower (सशक्तिकरण): बस्तर के युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना। कौशल विकास (Skill Development) के जरिए उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना।
- 5. Engage (जुड़ाव): स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए लोगों का प्रशासन के साथ विश्वास बढ़ाना। Bastar Olympics जैसे आयोजन इसी जुड़ाव (Engagement) का हिस्सा हैं।
दशकों का सूखा होगा खत्म (Ending the Isolation)
बस्तर के कई इलाके ऐसे हैं जहाँ अब तक प्रशासन की पहुंच नाममात्र की थी। Transitioning की इस प्रक्रिया में सरकार उन दुर्गम क्षेत्रों में नए पुल और 228 नई सड़कों का जाल बिछा रही है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि जब ‘कनेक्ट’ मजबूत होगा, तभी नक्सलवाद की जड़ें कमजोर होंगी।
‘अबूझमाड़’ से ‘ग्लोबल मार्केट’ तक का सफर
5-S फार्मूले के तहत बस्तर के स्थानीय उत्पादों (Minor Forest Produce) को वैश्विक बाजार (Global Market) से जोड़ने की तैयारी है। इससे आदिवासियों की आय सीधे तौर पर दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस ब्लूप्रिंट के माध्यम से बस्तर के हर नागरिक को यह महसूस कराया जाएगा कि सरकार उनके द्वार पर है, न कि उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे।

