Bastar Police दक्षिण बस्तर क्षेत्र के माओवादी संगठन में निर्दोष ग्रामीणों की हत्याओं को लेकर हो रही आपसी मतभेद में खुद एक-दुसरे को मार रहे है नक्सली।
छत्तीसगढ़ के Bastar की संस्कृति अपनी अनूठी परंपराओं, जनजातीय जीवनशैली और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के लिए जानी जाती है। यहां की सांस्कृतिक विरासत सदियों पुरानी है, जो आज भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली दिखाई देती है।
🔹 लोकजीवन और परंपराएं
बस्तर की संस्कृति का मूल आधार यहां के आदिवासी समुदाय हैं, जो अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और लोकविश्वासों को आज भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं। यहां के त्योहार, नृत्य और गीत प्रकृति और देवी-देवताओं के प्रति आस्था को दर्शाते हैं।
🔹 प्रसिद्ध त्योहार – बस्तर दशहरा
बस्तर का दशहरा देशभर में अलग पहचान रखता है। यह Bastar Dussehra लगभग 75 दिनों तक चलने वाला अनोखा पर्व है, जिसमें शक्ति की उपासना और जनजातीय परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
🔹 नृत्य और संगीत
बस्तर के लोकनृत्य जैसे गेंड़ी नृत्य, गौर नृत्य और ढोल-नगाड़ों की थाप यहां की संस्कृति को जीवंत बनाते हैं। ये नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक अभिव्यक्ति का माध्यम भी हैं।
🔹 खानपान और जीवनशैली
यहां का खानपान भी बेहद खास है। चापड़ा चटनी, महुआ, सल्फी जैसे पारंपरिक स्वाद बस्तर की पहचान हैं। लोग प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित सरल और संतुलित जीवन जीते हैं।
🔹 हस्तशिल्प और कला
बस्तर की धातु कला (बेल मेटल), बांस शिल्प और लकड़ी की नक्काशी विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। यहां के कारीगर अपनी पारंपरिक तकनीकों से अनोखी कलाकृतियां तैयार करते हैं, जो संस्कृति और कला का सुंदर मेल प्रस्तुत करती हैं।


