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भिलाई के पानी पर चमकेगी बिजली! NTPC और SAIL का बड़ा धमाका, फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के लिए मंगाए टेंडर

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भिलाई, छत्तीसगढ़। क्या आपने कभी सोचा है कि स्टील सिटी भिलाई की प्यास बुझाने वाले जलाशय अब शहर को रोशन भी करेंगे? छत्तीसगढ़ के औद्योगिक गलियारे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ पानी की सतह पर सौर पैनल बिछाकर बिजली पैदा करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

NTPC SAIL Power Company (NSPCL), जो कि भारत की दो दिग्गज कंपनियों NTPC और SAIL का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है, ने भिलाई के मरोदा जलाशय-2 (Maroda Reservoir-2) में 20 MW फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं।

🔥 Key Highlights: प्रोजेक्ट की बड़ी बातें

  • कुल क्षमता: 20 मेगावाट (MW) फ्लोटिंग सोलर।
  • स्थान: मरोदा जलाशय-2, भिलाई, छत्तीसगढ़।
  • निविदा की अंतिम तिथि: 18 मई, 2026।
  • जमानत राशि (EMD): ₹2 करोड़ (~$212,186)।
  • अनुरक्षण (O&M): सफल बोलीदाता को 3 साल तक रख-रखाव करना होगा।

काम का दायरा और तकनीक (Scope & Technology)

इस प्रोजेक्ट के तहत इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) का पूरा जिम्मा ठेकेदार का होगा। इसमें न केवल सौर मॉड्यूल (Solar Modules) की स्थापना शामिल है, बल्कि बिजली निकासी प्रणाली (Power Evacuation System) का विकास भी करना होगा।

इसमें सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सहायक प्रणालियों का डिज़ाइन और इंस्टालेशन ड्राइंग तैयार करना भी शामिल है। फ्लोटिंग सोलर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की समस्या को खत्म करता है और पानी के वाष्पीकरण (Evaporation) को भी कम करता है।

कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility Criteria)

NSPCL ने इस निविदा के लिए कड़े मानक तय किए हैं:

बैकग्राउंड: भिलाई बना रहा है रिकॉर्ड

यह पहली बार नहीं है जब भिलाई में पानी पर बिजली बनाने की तैयारी हो रही है। पिछले साल अक्टूबर में, NSPCL ने भिलाई स्टील प्लांट के मरोदा-1 जलाशय में पहले ही 15 MW का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चालू किया था। अब मरोदा-2 में 20 MW का नया प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करेगा।

चतुर नज़रिया (आगे की राह)

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के लिए, जो पारंपरिक रूप से कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन (Thermal Power) का केंद्र रहा है, यह फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) कम होगा, बल्कि भिलाई स्टील प्लांट को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) का एक विश्वसनीय विकल्प मिलेगा। आने वाले समय में राज्य के अन्य जलाशयों में भी इसी तरह के प्रोजेक्ट्स की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

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