रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मौजूदा साय सरकार के बीच वार-पलटवार का दौर जारी है। ताजा विवाद समग्र शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों के लिए निकाली गई फर्नीचर खरीदी की निविदा (Tender) को लेकर शुरू हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार के नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।
नियमों की अनदेखी का आरोप
भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि समग्र शिक्षा विभाग (छत्तीसगढ़ सरकार) ने स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए जो टेंडर जारी किया है, उसमें अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया गया है।
बघेल के अनुसार:
- भारत सरकार का स्पष्ट नियम है कि सरकारी विभागों द्वारा खरीदा जाने वाला फर्नीचर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणित होना चाहिए।
- यह नियम देश के सभी राज्यों पर अनिवार्य रूप से लागू होता है।
- लेकिन, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी ताजा टेंडर में BIS प्रमाणन की शर्त को ही गायब कर दिया गया है।
‘सांय-सांय’ तंज के साथ टेंडर निरस्त करने की मांग
अपने पोस्ट में बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पसंदीदा शब्द ‘सांय-सांय’ का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा। उन्होंने पूछा— “यह घोटाला है या घपला है सांय-सांय?” उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस टेंडर को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। बघेल ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर नियमों में सुधार नहीं किया गया, तो सरकार को आगामी विधानसभा सत्र में और जनता की अदालत में जवाब देना भारी पड़ेगा।
भ्रष्टाचार की आशंका
राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट के बाद चर्चा शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि BIS मानकों को हटाने का अर्थ घटिया दर्जे के फर्नीचर की आपूर्ति का रास्ता साफ करना हो सकता है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर आक्रामक नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में यह मामला सदन में भी गूंज सकता है।

