Bijli पदोन्‍नति का इंतजार कर रहे बिजली कर्मियों के लिए अच्‍छी खबर: देखिए-CSPTCL के HR का Order

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Bijli रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी के कर्मियों का प्रमोशन का मामला आरक्षण और कोर्ट केस में फंस कर रह गया है। कोर्ट का फैसला आ चुका है, इसके बावजूद रिटायरमेंट के करीब खड़े कर्मचारियों को पदोन्‍नति नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन ने बीच का रास्‍ता निकाला है।

ट्रांसमिशन कंपनी के एचआर ने जारी किया आदेश

बिजली कर्मियों के प्रमोशन को लेकर ट्रांसमिशन कंपनी के एचआर ने 23 जुलाई को एक आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ कोर्ट  के दिनांक 04.02.2019 (डब्ल्यूए 409/2013 पर पारित) और दिनांक 16.04.2024 (डब्ल्यूपीएस 9778/2019 पर पारित) के निर्णयों के अनुपालन में, CSPTCL के निदेशक मंडल (BOD) ने उच्च न्यायालय के निर्देशों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का संकल्प लिया।

पदोन्‍न्‍ति पर निर्णय लेने बनाई गई थी समिति

चरण-I में, 23.06.2004 (अर्थात् सी.जी. सिविल (पदोन्नति) नियम, 2003 को अपनाने से पूर्व की तिथि) की सशर्त वरिष्ठता सूची या भर्ती वरिष्ठता सूची, जो भी लागू हो, के आधार पर केवल स्पष्ट रिक्तियों के विरुद्ध ही पदोन्नतियां की गईं। और तीनों बिजली कंपनियों के मानव संसाधन विभाग के विभागाध्यक्ष की एक समिति, सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ, 17.12.2024 को गठित की गई थी, ताकि याचिकाकर्ताओं, कर्मचारियों, यूनियनों, संघों के अभ्यावेदनों की जांच की जा सके और उपलब्ध विकल्पों की व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के बाद प्रत्येक संवर्ग के लिए उपयुक्त तंत्र की सिफारिश की जा सके। समिति को आदेश की तिथि (अर्थात 17.03.2025) से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

अब तक रिपोर्ट प्रस्‍तुत नहीं कर पाई है समिति

समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है, जिसके परिणामस्वरूप अगले चरण की पदोन्नति के कार्यान्वयन में देरी हो रही है। परिणामस्वरूप, सेवानिवृत्ति के लिए तैयार कई कर्मचारियों/अधिकारियों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं कि इस देरी के कारण उन्हें अपनी उचित पदोन्नति से वंचित किया जा रहा है। इन कर्मचारियों ने अनुरोध किया है कि उन्हें पदोन्नति प्रदान की जाए, जो कि सीई (एचआर), सीएसपीटीसीएल द्वारा जारी आदेश संख्या 8113 दिनांक 19.12.2024 के प्रावधानों के अनुसार देय है।

पदोन्‍नति को लेकर कंपनी ने लिया यह निर्णय

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुपालन में, यह निर्णय लिया गया है कि जब तक सभी उचित समीक्षा डीपीसी/डीपीसी आयोजित नहीं की जाती है और परिणामस्वरूप न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उचित पदोन्नति प्रभावित नहीं होती है, तब तक ऐसे पात्र कर्मचारियों/अधिकारियों को उस पद पर उचित पदोन्नति प्रदान की जाए, जिस पर उनके कनिष्ठों को पूर्व में पदोन्नत किया गया था।

ऐसी पदोन्नतियां कर्मचारी/अधिकारी की सेवानिवृत्ति की तिथि से तीन महीने पहले प्रदान की जाएंगी और समीक्षा डीपीसी/डीपीसी की तिथि पर केवल निम्नलिखित 3 शर्तों की पूर्ति के अधीन होंगी: –

i.             कर्मचारी/अधिकारी निर्धारित एसीआर ग्रेडिंग मानदंडों को पूरा करता है, और

ii.            ऐसे कर्मचारी/अधिकारी के विरुद्ध कोई दंड/अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित नहीं होनी चाहिए।

iii. विगत में (23.06.2004 तक) ए.सी.आर. ग्रेड मानदण्ड पूरा न करने/दण्ड/अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने के आधार पर पदोन्नति से इन्कार किए जाने के परिणामस्वरूप अधिकारी/कर्मचारी को ऐसे कनिष्ठ अधिकारी द्वारा अधिष्ठित न किया गया हो।

पात्रता एवं वरिष्ठता के निर्धारण के लिए 23.06.2004 को प्रकाशित वरिष्ठता/ग्रेडेशन सूचियों को आधार माना जाएगा।

इन पदोन्नतियों को असाधारण, मामला-विशिष्ट उपायों के रूप में माना जाएगा तथा इन्हें भविष्य की पदोन्नतियों या दावों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, ये पदोन्नतियां भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एसएलपी (सी) डायरी संख्या 5555/2025 में कार्यवाही के अंतिम परिणाम के अधीन होंगी।

chatur postJuly 24, 2025
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