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बड़ी खबर: हेड मास्टर पदोन्नति पर हाई कोर्ट की रोक, TET की अनिवार्यता ने फंसाया पेंच!

High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट

High Court Promotion Stay: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रधान पाठक (Head Master) पद के लिए जारी प्रमोशन ऑर्डर के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

Interestingly (रोचक बात यह है), कि यह विवाद पुराने और नए नियमों के टकराव के कारण पैदा हुआ है। अदालत ने प्रथमदृष्टया माना कि विभाग ने नियमों की अनदेखी की है।

क्यों लगा पदोन्नति पर स्टे? (Reason for Stay)

दुर्गेश कुमार कश्यप और अन्य शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने यह आदेश दिया। Specifically (विशेष रूप से), मामले में निम्नलिखित कानूनी खामियां पाई गईं:

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला (Legal Standpoint)

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने दलील दी कि शिक्षा विभाग का यह आदेश RTE Act और NCTE के नियमों के खिलाफ है। Furthermore (इसके अलावा), सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के अपने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि बिना TET पास किए पदोन्नति का कोई कानूनी हक नहीं बनता।

शिक्षक संघ में नाराजगी और समीक्षा की मांग (Protest and Review)

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। In fact (वास्तव में), संघ के प्रांताध्यक्ष रवीन्द्र राठौर का कहना है कि पुराने शिक्षकों पर TET थोपना गलत है।

क्या होगा अगला कदम? (Key Highlights)

In short (संक्षेप में), हाई कोर्ट के इस स्टे ने बस्तर संभाग के हजारों शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। विभाग की एक छोटी सी लापरवाही अब बड़ी कानूनी जंग बन चुकी है।


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