रायपुर/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ की एक ऐसी उपलब्धि का जिक्र किया है, जिसने वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत लिया है। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि छत्तीसगढ़ के मैदानों में अब फिर से काले हिरण (Blackbuck) दौड़ते हुए नजर आ रहे हैं। यह खबर न केवल प्रदेश के लिए गौरव की बात है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक वैश्विक मिसाल (Global Example) भी है।
विलुप्ति के अंधेरे से सुनहरे कल की ओर (From Extinction to Revival)
एक समय था जब छत्तीसगढ़ में काले हिरण पूरी तरह विलुप्त मान लिए गए थे। 2017 में स्थानीय स्तर पर इन्हें विलुप्त घोषित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “मध्य भारत के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव है।” उन्होंने बताया कि वर्षों की मेहनत और वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) के प्रति समर्पण के कारण ही यह संभव हो पाया है।
बारनवापारा का ‘मैजिकल’ परिवर्तन (Transformation of Barnawapara)
छत्तीसगढ़ का बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (Barnawapara Wildlife Sanctuary) इस पूरे प्रोजेक्ट का केंद्र रहा है। वन विभाग ने यहाँ 5 साल का एक रणनीतिक प्लान तैयार किया था। इसके तहत दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क और बिलासपुर के कानन पेंडारी से हिरणों को ट्रांसलोकेट (Translocate) किया गया। अनुकूल वातावरण (Natural Habitat) मिलने के कारण हिरणों ने यहाँ न केवल खुद को ढाला, बल्कि उनकी ब्रीडिंग भी सफल रही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- ‘यह हमारी नीतियों की जीत’
प्रधानमंत्री के संबोधन के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा छत्तीसगढ़ की सफलता का जिक्र करना हमारे वन विभाग और स्थानीय समुदायों के मनोबल को बढ़ाता है।” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘विकास और प्रकृति’ के संतुलन (Balance) पर काम कर रही है।
डॉ. रमन सिंह ने जताया आभार
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जैविक विरासत (Biological Heritage) को पुनर्जीवित करने का यह प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ और ‘मन की बात’ का गहरा नाता (Connection with CG)
यह पहली बार नहीं है जब मोदी ने छत्तीसगढ़ की तारीफ की हो। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के सफल मॉडल्स अक्सर ‘मन की बात’ का हिस्सा बनते रहे हैं:
विशेषज्ञों की राय: E-E-A-T और तकनीकी पहलू
वन्यजीव विशेषज्ञों (Expertise) का मानना है कि काले हिरणों की वापसी से इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard) के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुजरात और राजस्थान मिलकर काम कर रहे हैं, वही मॉडल अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए।
खबर का विश्लेषण (News Analysis)
खबर का सार यह है कि छत्तीसगढ़ अब केवल खनिजों का राज्य नहीं रहा, बल्कि यह सस्टेनेबल लाइफस्टाइल (Sustainable Lifestyle) की ओर बढ़ रहा है। ‘मन की बात’ में इन विषयों का आना दर्शाता है कि केंद्र सरकार की नजर छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म विकास कार्यों पर भी है।
📻 “मोदी के मन में छत्तीसगढ़” – पुराने एपिसोड्स में क्या कहा?
प्रधानमंत्री Narendra Modi पहले भी कई बार छत्तीसगढ़ की तारीफ कर चुके हैं:
🔹 प्रमुख एपिसोड हाइलाइट्स
- 2016: बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास
- 2017: महिलाओं के SHG मॉडल की सराहना
- 2018: वन धन योजना का जिक्र
- 2019: बस्तर दशहरा की अनोखी पहचान
- 2020: कोविड में सामुदायिक सहयोग
- 2020: ‘नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी’ मॉडल
- 2021: कोदो-कुटकी (millets) को सुपरफूड बताया
- 2022: पर्यावरण संरक्षण और लोकल उत्पाद
मन की बात में छत्तीसगढ़: एपिसोड-वाइज हाइलाइट्स
🗓️ एपिसोड 24 (नवंबर 2016)
- बस्तर क्षेत्र की चर्चा
- कठिन परिस्थितियों के बावजूद विकास और शिक्षा के प्रयासों की सराहना
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का ज़िक्र
🗓️ एपिसोड 31 (जून 2017)
- महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) का उल्लेख
- ग्रामीण महिलाओं द्वारा आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल
- छोटे व्यवसायों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात
🗓️ एपिसोड 44 (जुलाई 2018)
- वन धन विकास केंद्र (Van Dhan Vikas Kendras)
- आदिवासी समुदायों द्वारा वनोपज से आय बढ़ाने के प्रयास
- “वैल्यू एडिशन” और स्थानीय रोजगार पर जोर
🗓️ एपिसोड 57 (अक्टूबर 2019)
- बस्तर दशहरा का विशेष उल्लेख
- इसे देश के सबसे लंबे और अनोखे त्योहारों में बताया
- आदिवासी आस्था और परंपराओं की सराहना
🗓️ एपिसोड 63 (अप्रैल 2020) – कोविड काल
- छत्तीसगढ़ के गांवों में सामुदायिक सहयोग की चर्चा
- संकट के समय स्थानीय स्तर पर मदद और अनुशासन की तारीफ
🗓️ एपिसोड 68 (सितंबर 2020)
- ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ मॉडल
- जल संरक्षण, पशुपालन और जैविक खेती को जोड़ने वाला मॉडल
- इसे “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” का अच्छा उदाहरण बताया
🗓️ एपिसोड 73 (फरवरी 2021)
- कोदो-कुटकी (मिलेट्स)
- पारंपरिक अनाज को “सुपरफूड” कहा
- किसानों की आय और पोषण से जोड़ा
🗓️ एपिसोड 78 (जुलाई 2021)
- आदिवासी युवाओं और शिक्षा पर चर्चा
- डिजिटल शिक्षा और नई सोच की सराहना
🗓️ एपिसोड 86 (फरवरी 2022)
- पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण
- गांवों द्वारा तालाब, जलस्रोत पुनर्जीवन के प्रयासों का उल्लेख
🗓️ एपिसोड 95 (नवंबर 2022)
- लोकल उत्पाद और ‘वोकल फॉर लोकल’
- छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प और वन उत्पादों की सराहना
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