Budget रायपुर। 1 नवंबर 2000 को अलग राज्य बनने से पहले छत्तीसगढ़ देश के बिमारु राज्य कहे जाने वाले मध्य प्रदेश का हिस्सा था। राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ ने तेजी से प्रगति की उड़ान भारी। छत्तीसगढ़ के इस विकास की गवाही राज्य का बजट भी दे रहा है। 25 साल में छत्तीसगढ़ का बजट डेढ़ लाख करोड़ के पार चला गया है।
वर्ष 2000 में देश में एक साथ तीन राज्य बने थे। सबसे पहले मध्य प्रदेश से अलग करके छत्तीसगढ़ का गठन किया गया। इसके बाद बिहार से अलग झारखंड और उत्तर प्रदेश का विभाजन कर उत्तराखंड का निर्माण हुआ।
एक साथ बने छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड विकास की संभावनाओं वाले राज्य हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य हैं। दोनों राज्यों में कोयला और लोहा समेत अन्य खनिजों का भंडार है। उधर उत्तराखंड प्राकृतिक और पर्यटन की संभावनों से भरा राज्य है।
छत्तीसगढ़ का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट कल यानी 24 फरवरी को सदन में पेश होगा। झारखंड और उत्तरखंड का बजट भी अभी पेश नहीं हुआ। 2025-26 के तीनों राज्यों के बजट की तुलना की जाए तो छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों से कहीं आगे है।
छत्तीसगढ़ 1 लाख 65 हजार 100 करोड़
झारखंड 1 लाख 36 हजार 653 करोड़
उत्तराखंड 75 हजार 170 करोड़
प्रति व्यकित सकल घरेलू उत्पाद यानी जीएसपीडी के मामले में कम बजट वाला उत्तराखंड खनिज संपन्न छत्तीसगढ़ और झारखंड से काफी आगे है।
छत्तीसगढ़ में 2024-25 में जीएसपीडी 1 लाख 62 हजार 870 रुपए का अनुमान था।
झारखंड में 2024-25 में जीएसपीडी का अनुमान 1 लाख 15 हजार 960 रुपए का था।
उत्तराखंड में 2024-25 के लिए जीएसपीडी का अनुमान दो लाख 95 हजार 751 रुपए आंका गया था।
2001-02 7 हजार 294 करोड़
2002-03 8 हजार 471 करोड़
2003-04 9 हजार 978 करोड़
2004-05 10 हजार 555 करोड़
2005-06 11 हजार 242 करोड़
2006-07 13 हजार 185 करोड़
2007-08 16 हजार 473 करोड़
2008-09 19 हजार 392 करोड़
2009-10 23 हजार 482 करोड़
2010-11 26 हजार 099 करोड़
2011-12 32 हजार 477 करोड़
2012-13 39 हजार 677 करोड़
2013-14 44 हजार 169 करोड़
2014-15 54 हजार 710 करोड़
2015-16 65 हजार 013 करोड़
2016-17 76 हजार 032 करोड़
2017-18 88 हजार 599 करोड़
2018-19 95 हजार 899 करोड़
2019-20 1 लाख 20 हजार करोड़
2021-22 97 हजार 106 करोड़
2022-23 1 लाख 04 हजार 603 करोड़
2023-24 1 लाख 21 हजार 501 करोड़
2024-25 1 लाख 47 हजार 446 करोड़
2025-26 1 लाख 65 हजार 100 करोड़