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Cartoon War छत्‍तीसगढ़ में राजनीतिक दलों की घिनौनी करतूत: मर्यादा सारी सीमाएं लांघ रहे नेता…

Cartoon War छत्‍तीसगढ़ में राजनीतिक दलों की घिनौनी करतूत: मर्यादा सारी सीमाएं लांघ रहे नेता...

Cartoon War  रायपुर। राज नेता राजनीति का स्‍तर कितना नीचे गिराएंगे, इसकी कोई सीमा है या नहीं? यह सवाल छत्‍तीसगढ़ में सियात के प्रतिदिन गिरते स्‍तर को देखते हुए पूछा जा रहा है। छत्‍तीसगढ़ में दो ही प्रमुख राजनीतिक दल हैं। भाजपा और कांग्रेस। दोनों ही दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया में मर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ दी है और एक- दूसरे को कुत्‍ता- बंदर साबित करने पर तुल गए हैं।

किसने कितना गिराया राजनीति का स्‍तर

सोशल मीडिया में इस घिनौनी राजनीति की शुरुआत किसने की और कौन कितनी मर्यादा लांघा, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन इस काम में दोनों ही दल पीछे नहीं है।

Cartoon War  कांग्रेस ने सीएम को बताया बंदर, तो भाजपा ने पूर्व सीएम को कुत्‍ता

मामला सोशल मीडिया में चल रहे कार्टून वार से जुड़ा है। छत्‍तीसगढ़ कांग्रेस की तरफ से एक काटून जारी किया गया। इसमें मुख्‍यमंत्री विष्‍णुदेव साय को बंदर दिखा गया है। इसके जवाब में भाजपा ने भी एक कार्टून जारी किया है। इसमें पूर्व सीएम भूपेश बघेल को कुत्‍ता बना दिया गया है।  

भाजपा का आरोप कांग्रेस ने की शुरुआत

भाजपा के युवा नेता उज्‍ज्‍वल दीपक ने सोशल मीडिया में एक पोस्‍ट करके इसके लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार बताया है। उन्‍होंने लिखा है कि कांग्रेस की तरफ से इन दिनों लगातार असंसदीय शब्दों और भद्दे कार्टूनों का सहारा लेकर भाजपा नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा करते हुए कांग्रेस अपने नेता राहुल गांधी की तरह ही किसी भी तरह की मर्यादा का ध्यान नहीं रखती है।

कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के लिए लगातार अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी में हाल में पहले तो कांग्रेस ने उन्हें सैयारा फिल्म की तर्ज पर अदानी के साथ चित्रित किया, तब भी हमने संयमित प्रतिक्रिया ही दी। उसके बाद तो तमाम मर्यादाओं को धत्ता बताते हुए, इस बार मुख्यमंत्री को एक बंदर के रूप में कांग्रेस ने चित्रित किया।

Cartoon War  आदिवासी मुख्‍यमंत्री का अपमान

दीपक ने लिखा है कि ऐतिहासिक बहुमत से चुनी गई पार्टी के नेता, एक सहज-सरल आदिवासी मुख्यमंत्री का ऐसा अपमान ??

इन दोनों कार्टून पर समाज में भी काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ तटस्थ समझे जाने वाले लोगों ने भी इसकी आलोचना की है।

“हमारे सहज सरल आदिवासी नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री को इतना अपमानजनक चित्रित किया जाना जिन लोगों को बुरा नहीं लगा, वे अब भूपेश का कार्टून बनाए जाने पर घड़ियाली आसूं बहा रहे हैं ?

आखिर मुख्यमंत्री का अपराध क्या है? वे आदिवासी समाज से आते हैं तो क्या आप कुछ भी कह देंगे? अब ऐसी बदजुबानी सहन नहीं की जाएगी।

यह नए दौर की भाजपा है

उन्‍होंने लिखा है कि निस्संदेह हम अलग तरह की पार्टी हैं और रहेंगे। लेकिन गाली खाने के लिए नहीं। हम सुशासन और पारदर्शिता आदि के मामले में अलग दल हैं और रहेंगे। किंतु यह नई तरह की, नए दौर की भाजपा है। यह नई भाजपा, पाकिस्तान को उसके घर में घुस कर मारना भी जानती है।

 फाइट गुरिल्ला लाइक ए गुरिल्ला

भाजपा नेता दीपक ने नक्‍सलियों के खिलाफ की जा रही कार्यवाही का उल्‍लेख करते हुए लिखा है कि नक्सलियों को उसकी मांद में घुस कर न्यूट्रलाइज करना भी जानती है। वह शब्द से माओवाद फैलाने वालों से भी उन्हीं की भाषा में निपटना अब शुरू कर चुकी है। ‘फाइट गुरिल्ला लाइक ए गुरिल्ला!’ गालीबाज गुरिल्लों की भद्दी बोली का जवाब वैसी ही बोलियों से, गोली वाले गुरिल्लों के गोली का जवाब गोली से, अब यही हमारी नीति है।

कांग्रेस और उसके ईको सिस्टम के लोग ऐसे पलटवार की उम्मीद नहीं कर रहे थे। उनके खेमे में सन्नाटा है और अब वे विक्टिम कार्ड खेल कर बचाव की मुद्रा में हैं।

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