
Cashless रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में लागू कैशलेस योजना हुए खर्च पर सवाल उठने लगा है। योजना में अब तक 40 करोड़ रुपए खर्च हुआ है। वहीं, कंपनी ने अब अंशदान की राशि बढ़ा दी है। ऐसे में इस योजना में हुए खर्च की सीधे अकाउंटेंट जनरल से ऑडिट कराने की मांग की जा रही है।
चेयरमैन से की गई ऑडिट की मांग
कैशलेस योजना किए गए खर्च का ऑडिट कराने की मांग को लेकर पावर ट्रांसमिशन कंपनी के चेयरमैन से की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन के सचिव सुधीर नायक चेयरमैन सुबोध कुमार सिंह को ज्ञापन सौंप कर यह मांग की है।
Cashless कैशलेस योजना में बढ़ी अंशदान की राशि
उल्लेखनीय है कि कंपनी प्रबंधन ने कैशलेस योजना में कर्मचारियों के अंशदान की राशि बढ़ा दी है। अभी तक पांच लाख तक के ईलाज के लिए हर महीने 500 और 10 लाख के लिए एक हजार रुपए देना पड़ता था। अब यह राशि बढ़ाकर 600 और 1200 रुपए कर दी गई है।
टैरिफ में राशि का प्रवधान
पेंशनर्स एसोसिएशन के सचिव सुधीर नायक के अनुसार 2025-27 के लिए जारी टैरिफ में कर्मचारियों और पेंशनरों की चिकित्सा सुविधा पर होने वाले खर्च का समावेश किया गया है। इसके बावजूद अंशदान की राशि बढ़ा दी गई है।
सितंबर में हुई थी बैठक
बिजली कंपनी में लागू कैशलेस योजना को लेकर सितंबर के पहले सप्ताह में कंपनी मुख्यालय में सभी पक्षों की बैठक हुई थी। इसमें कंपनी के इंजीनियर्स, कर्मचारी और पेंशनर्स के संगठन शामिल हुए थे। बैठक के दौरान योजना में सुधार को लेकर कई सुझाव दिए गए थे।
Cashless बैठक के बाद बढ़ाई गई अंशदान की राशि
इस बैठक के बाद कंपनी प्रबंधन की तरफ से योजना में कर्मचारियों के अंशदान की राशि बढ़ा दी गई है। बिजली कर्मचारी नेताओं के अनुसार पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में अंशदान की राशि यहां से कम है।




