Irregular Employee रायपुर। छत्तीसगढ़ में दैनिक वेतनभोगी और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर किए गए वादे को सरकार भूल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीयत साफ नहीं है और वह आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों का शोषण कर रही है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
दीपक बैज ने बिलासपुर उच्च न्यायालय की हालिया सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकार एक ‘संवैधानिक नियोक्ता’ है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा है कि गरीब कर्मचारियों के हक मारकर बजट संतुलित नहीं किया जा सकता। माननीय न्यायालय ने बुनियादी सेवाओं में लगे इन कर्मचारियों के हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का कठोर निर्देश दिया है।
100 दिन का वादा और सवा दो साल का इंतजार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा को याद दिलाया कि चुनाव से पहले 100 दिनों के भीतर नियमितीकरण का वादा किया गया था, लेकिन सवा दो साल बीत जाने के बाद भी प्रदेश के लाखों कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बैज ने कहा:
“भाजपा सरकार हर विभाग में आउटसोर्सिंग के जरिए काम लेकर नियमित नियुक्तियों से बचने का कुत्सित प्रयास कर रही है। यह सीधे तौर पर शिक्षित युवाओं और अनुभवी कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”
हर वर्ग सड़क पर: शोषण का आरोप
दीपक बैज ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज प्रदेश में कोई भी वर्ग खुश नहीं है।
- 47,000 स्कूल सफाई कर्मचारी और 13,000 रसोइए अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं।
- 12,000 बिजली कर्मचारी वर्षों की सेवा के बाद भी नियमितीकरण की राह देख रहे हैं।
- डीएड-बीएड अभ्यर्थी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी और विद्या मितान शोषण के शिकार हो रहे हैं।
एस्मा (ESMA) का डर दिखाकर दबाई जा रही आवाज
बैज ने आरोप लगाया कि एक तरफ कर्मचारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार एस्मा (ESMA) का डर दिखाकर लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार बहानेबाजी छोड़े और तत्काल आउटसोर्सिंग बंद कर नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करे।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो पार्टी कर्मचारियों के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।

