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सियासी पारी की तैयारी में बिजली कंपनी के ‘बड़े साहब’: चल पड़े हैं माननीय बनने की राह पर

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Electricity Company Officer Politics रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी (State Power Company) में इन दिनों वोल्टेज से ज्यादा ‘सियासी गर्मी’ बढ़ी हुई है। खबर है कि कंपनी के एक Big Boss (बड़े अधिकारी) पर राजनीति में प्रवेश का जुनून सवार हो गया है। साहब ने सरकारी कुर्सी पर रहते हुए ही पूरी तरह से Public Representative (जनप्रतिनिधि) वाले मोड में काम करना शुरू कर दिया है।

गुपचुप तैयारी हो गई सार्वजनिक

सियासी परी की तैयारी साबह ने गुपचुप तरीके से शुरू की थी, लेकिन ज्‍यादा दिनों तक यह बात छिपी नहीं रह सकती। साहब की सक्रियता और बदलते हुए मिजाज ने खुद ही इसे सार्वजनिक कर दिया है।

खत्म होने वाला है कार्यकाल (Term Ending Soon)

सूत्रों की मानें तो इन बड़े साहब को एक बार Extension (सेवा विस्तार) मिल चुका है। अब उनका कार्यकाल कुछ महीने ही बचा है। साहब को अब एक्‍सटेंशन मिलने की उम्‍मीद कम नजर आ रही है, ऐसे में उन्‍होंने Political Arena (सियासी अखाड़े) में उतरने का मन बना लिया है। उनकी सक्रियता की चर्चा पावर कंपनी से लेकर राजनीतिक गलियारों तक होने लगी है।

पत्नी को भी ‘प्लान-बी’ के लिए किया सक्रिय

साहब की दूरदर्शिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे अकेले तैयारी नहीं कर रहे हैं। Internal Sources (करीबी सूत्रों) के अनुसार:

रसूख ऐसा कि प्रोटोकॉल भी हैरान

साहब का जलवा इन दिनों देखते ही बनता है। उनके दौरों में सरकारी तामझाम किसी मंत्री से कम नहीं होता:

जनता के बीच बढ़ती सक्रियता (Active Outreach)

साहब केवल दौरा ही नहीं कर रहे, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए Special Interest (विशेष रुचि) ले रहे हैं। चुनाव लड़ने की चाहत वाले क्षेत्र में वे लोगों की आर्थिक समेत किसी भी तरह की मदद करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। अधिकारियों के बीच चर्चा है कि साहब का यह बदला हुआ अंदाज उनके Career Change (करियर परिवर्तन) का स्पष्ट संकेत है।

छत्‍तीसगढ़ विधानसभा में कई नौकरशाह और पूर्व शासकीय सेवक

छत्‍तीसगढ़ की मौजूदा विधानसभा में कई विधायक पूर्व नौकरशाह और पूर्व शासकीय सेवक हैं। मंत्री ओपी चौधरी आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए हैं। मंत्री टंकराम वर्मा भी पूर्व शासकीय सेवक हैं।

नीलकंठ टेकाम सेवानिवृत्‍त आईएएस हैं तो रामकुमार टोप्‍पो अर्द्ध सैनिक बल में रह चुके हैं। इनके आलावा भी कुछ और विधायक हैं जो शासकीय सेवा में रह चुके हैं।

चतुर विचार: सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों का राजनीति की ओर झुकाव नया नहीं है, लेकिन कार्यकाल के दौरान इस तरह की सक्रियता Ethical Standards (नैतिक मानकों) और विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े करती है।

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