बिलासपुर । छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी के अधिकारियों के काले कारनामों का एक और बड़ा खुलासा (Revelation) हुआ है। विभाग के ओएंडएम (O&M) सर्किल में अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए सरकार को करोड़ों रुपयों का नुकसान पहुँचाया है।
जांच रिपोर्ट (Investigation Report) के मुताबिक, बिजली कंपनी के अधिकारियों ने साठगांठ (Collusion) कर बड़े और रईस उपभोक्ताओं को कागजों में ‘गरीब’ (BPL) बना दिया। इस हेरफेर (Manipulation) के जरिए करीब 4.41 करोड़ रुपये का गबन किया गया है।
सेफ सिस्टम (SAFE System) में ऐसे बदली कैटेगरी
यह पूरा घोटाला डिजिटल तरीके से अंजाम दिया गया। अधिकारियों ने विभाग के ‘सेफ सिस्टम’ का गलत इस्तेमाल किया। सबसे पहले सामान्य उपभोक्ताओं (Non-BPL) की टैरिफ कैटेगरी को बदलकर ‘BPL प्लेन रेट’ पर सेट किया गया। जैसे ही उन्हें भारी-भरकम छूट (Discount) मिल गई, सिस्टम में उनकी कैटेगरी वापस पुरानी कर दी गई।
घोटाले की बड़ी बातें (Key Highlights)
- कुल घोटाला: ₹4.41 करोड़ की राजस्व हानि (Revenue Loss)।
- फर्जीवाड़ा: 2,758 उपभोक्ताओं को अवैध रूप से बिजली बिल में छूट दी गई।
- सिस्टम का दुरुपयोग: घोटाले को अंजाम देने के लिए 95 सेफ आईडी (SAFE ID) का इस्तेमाल हुआ।
- जांच टीम: मुख्यालय द्वारा गठित समिति (JS Netam और VR Maurya) ने गड़बड़ी की पुष्टि की है।
10 हजार से 80 हजार तक का फायदा
आरोप है कि सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) स्तर पर यह पूरा खेल (Scam) खेला गया। अधिकारियों ने घरेलू और कमर्शियल (Commercial) उपभोक्ताओं से गुप्त डील की। इसके बदले में उपभोक्ताओं को 10 हजार से लेकर 80 हजार रुपये तक की छूट दिलवाई गई।
जांच में हुई पुष्टि (Confirmed by Audit)
लिखित शिकायत मिलने के बाद कंपनी के चेयरमैन और एमडी ने जांच के आदेश दिए थे। जांच समिति को दस्तावेजों (Documents) में बदलाव के पुख्ता सबूत मिले हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि निजी स्वार्थ के लिए कंपनी के खजाने को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचाया गया है। अब दोषियों पर सख्त कार्रवाई (Strict Action) की तलवार लटक रही है।
Chatur विचार: सरकारी सिस्टम में इस तरह की सेंधमारी यह बताती है कि डिजिटल सुरक्षा के बावजूद अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का राजस्व (Revenue) चोरी हो रहा है। प्रशासन को अब रिकवरी के साथ-साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

