रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में आगामी शिक्षा सत्र 2026-27 बड़े बदलावों और चुनौतियों के साथ शुरू होने वाला है। एक ओर जहाँ प्रदेश के लाखों स्कूली बच्चे नए रंग-रूप वाली यूनिफॉर्म में नजर आएंगे, वहीं दूसरी ओर पाठ्य पुस्तकों की छपाई में हो रही देरी ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
बदल गया यूनिफॉर्म का रंग: अब ‘ब्लू चेक’ और ‘स्लेटी’ होगा नया कोड
छत्तीसगढ़ शासन ने सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए निर्धारित पुराने ड्रेस कोड को बदल दिया है। अब तक छात्र आसमानी शर्ट और नेवी ब्लू पैंट/ट्यूनिक पहनते थे।
यह बदलाव:
- शर्ट: ब्लू चेक प्रिंट।
- पैंट/ट्यूनिक: स्लेटी (Grey) कलर।
- विस्तार: सरगुजा और बस्तर संभाग में यह बदलाव पहले ही शुरू हो चुका है, लेकिन नए सत्र से रायपुर, दुर्ग और बस्तर के शेष जिलों में भी बच्चे इसी नए लुक में नजर आएंगे।
हाथकरघा संघ ने मारी बाजी, बस्तर से सप्लाई शुरू
छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ ने इस बार रिकॉर्ड समय में यूनिफॉर्म की आपूर्ति शुरू कर दी है। संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन ने बताया कि 1961 स्व-सहायता समूहों और 320 बुनकर समितियों के माध्यम से 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देते हुए इस बार समय से पहले तैयारी पूरी की गई है।
- कुल सप्लाई: 51 लाख 11 हजार 362 सेट।
- शुरुआत: बस्तर संभाग के 5 जिलों (सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और कोंडागांव) में 4.37 लाख से अधिक यूनिफॉर्म भेजी जा चुकी हैं।
किताबों की छपाई में देरी: क्या पहले दिन खाली रहेंगे बस्ते?
यूनिफॉर्म के मोर्चे पर जहाँ अच्छी खबर है, वहीं पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) की सुस्ती भारी पड़ सकती है। प्रदेश के 44 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए अभी तक किताबों की प्रिंटिंग शुरू नहीं हो पाई है।
मौजूदा स्थिति:
- कागज खरीदी के लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत 6 फर्में पात्र हुई हैं।
- अभी प्रिंटर्स का चयन होना बाकी है।
- जानकारों का मानना है कि इस देरी के कारण पिछले साल की तरह इस बार भी सत्र के पहले दिन बच्चों को सभी विषयों की किताबें मिलना मुश्किल लग रहा है।
चतुरपोस्ट का विश्लेषण: सरकार का लक्ष्य बच्चों को सत्र शुरू होने से पहले ही सारी सुविधाएं देना है। हाथकरघा संघ ने तो अपनी जिम्मेदारी निभा दी है, अब सबकी नजरें पाठ्य पुस्तक निगम पर टिकी हैं कि वे कितनी जल्दी बच्चों के हाथों में किताबें पहुँचाते हैं।

