Chhattisgarhकर्मचारी हलचल

बड़ा सवाल: तो क्या अब छत्तीसगढ़ में पेंशनर्स, संविदा, आउटसोर्सिंग और दैवेभो की नहीं होगी सुनवाई? सरकार के एक फैसले ने बढ़ाई बेचैनी

CG Government Servants नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘शासकीय सेवक नियम 2025’ में किए गए ताज़ा संशोधन ने राज्य के लाखों कर्मचारियों के बीच खलबली मचा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की नई अधिसूचना के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में पेंशनर्स, संविदा (Contractual), आउटसोर्सिंग और दैनिक वेतन भोगी (Daily Wage) कर्मचारियों की आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं बचेगा?

संघों से ‘बाहरी’ दखल खत्म करने की तैयारी

अधिसूचना के खंड (ग) में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी संघ का पदाधिकारी या सदस्य केवल वही हो सकता है, जो ‘वर्तमान में नियमित शासकीय सेवा में कार्यरत’ हो। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब रिटायर हो चुके अनुभवी पेंशनर्स या बाहरी अनुभवी लोग किसी संगठन का नेतृत्व नहीं कर पाएंगे।

क्या दबेगी अनियमितों की आवाज़?

छत्तीसगढ़ में संविदा, आउटसोर्सिंग और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की संख्या लाखों में है। अब तक कई नियमित कर्मचारी संगठन इनके हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं। लेकिन नए नियमों में ‘शासकीय सेवक’ की परिभाषा को केवल ‘नियमित स्थापना’ तक सीमित कर देने से एक बड़ा वैधानिक संकट खड़ा हो गया है। चर्चा यह है कि यदि संगठन में केवल नियमित और सेवारत लोग ही रहेंगे, तो क्या वे संविदा और अन्य गैर-नियमित कर्मचारियों के मुद्दों को पहले की तरह प्राथमिकता देंगे?


छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के दायरे में कौन-कौन आता है?

आपने पुख्ता जानकारी मांगी है, तो बता दें कि यह नियम काफी व्यापक हैं लेकिन इसकी कुछ स्पष्ट सीमाएं हैं:

1. दायरे में आने वाले (Who are included):

  • नियमित सरकारी कर्मचारी: राज्य सरकार के अधीन सभी मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों में ‘नियमित’ पदों पर नियुक्त कर्मचारी।
  • राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारी: क्लास-1 से लेकर क्लास-4 तक के सभी स्थायी कर्मचारी।
  • प्रतिनियुक्ति पर गए कर्मचारी: यदि कोई राज्य का कर्मचारी किसी दूसरे विभाग या संस्था में डेप्युटेशन पर है, तो भी वह इसी नियम से बंधा रहता है।

2. जो दायरे से बाहर हैं (Who are generally excluded):

  • पेंशनर्स: रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी ‘शासकीय सेवक’ की श्रेणी से बाहर हो जाते हैं, उन पर ‘पेंशन नियम’ लागू होते हैं, न कि आचरण नियम (जब तक कि कोई विशेष मामला न हो)।
  • संविदा और आउटसोर्सिंग: इन पर आचरण नियम 1965 के बजाय उनके ‘अनुबंध’ (Contract) की शर्तें लागू होती हैं।
  • आकस्मिकता/दैनिक वेतन भोगी: ये नियमित स्थापना का हिस्सा नहीं होते, इसलिए सीधे तौर पर इन नियमों के दायरे में नहीं आते।

निष्कर्ष: यही कारण है कि नई अधिसूचना में “नियमित स्थापना” और “आचरण नियम 1965” का उल्लेख करना बहुत मायने रखता है। यह स्पष्ट रूप से उन लोगों को संगठनों से बाहर करने का एक कानूनी तरीका है जो सीधे तौर पर इन नियमों के दायरे में नहीं आते।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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