CG News रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाने की संभावना बढ़ गई है। यह पोस्ट बैज ने 2021 में किया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मीडिया सलाहकार पंजक झा सोशल मीडिया में तीखा हमला बोला है।
यह पूरा मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरा से जुड़ा है। बता दें कि दरअसल, छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर माओवादी आतंक को संरक्षण देने के आरोप पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसको लेकर श्री शाह और भाजपा पर निशाना साधा तो मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंजक झा ने श्री बघेल के साथ कांग्रेस की पोल खोल दी है।
मीडिया सलाहकार श्री झा ने सोशल मीडिया में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के एक पोस्ट का स्क्रीन शार्ट शेयर किया है। फोटो तीन अप्रैल 2021 की है। लिखा है कि छत्तीसगढ़ के तब के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, तब के बस्तर सांसद दीपक बैज दोनों असम में कथित ऐतिहासिक रोड शो के बाद एक रेस्तरा में थकान उतार रहे थे। हंसते-खिलखिलाते हुए कथित सफल चुनाव प्रचार को सेलिब्रेट कर रहे थे, आनंद मना रहे थे।
उसी दिन बस्तर संभाग के बीजापुर में नृशंस नक्सल हमले में देश ने सुरक्षा बलों के 22 जवानों को खोया था। 36 जवान बुरी तरह घायल भी हुए थे। उस हमले की जानकारी के घंटों बाद की यह तस्वीर है जो स्वयं बस्तर सांसद ने पोस्ट किया था।
उसी असम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी थे। नक्सल वारदात की खबर लगते ही सारा चुनाव कार्य छोड़ उड़ पड़े थे छत्तीसगढ़ की तरफ। जब तक तब के मुख्यमंत्री और स्थानीय सांसद वहां मौज करते हुए फोटो पोस्ट करने में लगे थे, तब तक एक दौर की बैठक निपटा कर, घायलों की चिकित्सा आदि का प्रबंध कर अमित शाह नक्सलियों से बदला लेने की रणनीति की तैयारी भी कर चुके थे।
जबकि प्रदेश के ये दोनों हजरात कुल 30 घंटे के बाद थकान पूरी तरह उतार कर वापस छत्तीसगढ़ पहुंचे थे, तरो-ताजा होकर। गृह मंत्री अमित शाह ने तब की प्रदेश सरकार द्वारा नक्सलियों को जिस प्रश्रय और आसरे देने की बात की है, उसका इससे अधिक गंभीर साक्ष्य और क्या चाहिए भला? क्या लगता है आपको? बिना प्रश्रय और आसरा के ऐसी संवेदनाविहीन निष्ठुरता आ सकती है कभी सूबेदार और स्थानीय सांसद की? श्री झा ने लिखा है कि अब जब माओवादी आतंक लगभग उन्मुक्ति के मुहाने पर है, जब केंद्र सरकार के संकल्प और विष्णुंदेव साय की सरकार के लगन से यह कोढ़ समाप्त होने की स्थिति में आ गया है, तब बार-बार कांग्रेस के ऐसे कृत्यों को याद करते रहने की आवश्यकता है, ताकि सनद रहे। श्री झा ने आगे लिखा है कि केंद्रीय गृह मंत्री जी ने यूं ही नहीं कह दिया है कि कांग्रेस के प्रश्रय और आसरे से ही माओवादी आतंक फूला-फला। सही है न? क्या लगता है आपको?