
CG News रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में कैशलेस योजना को लेकर अब से कुछ देर बाद मुख्यालय में बैठक होने जा रही है। इस बैठक में कंपनी के इंजीनियर्स, अफसर और कर्मचारियों के साथ ही पेंशनर्स को भी बुलाया गया है। इस बैठक से पहले ही पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव सुधीर नायक ने बिजली कंपनियों के दोनों चेयरमैन IAS सुबोध सिंह और IAS डॉ रोहित यादव को पत्र लिखा है।
महासचिव श्री नायक ने लिखा है कि प्रदेश में करीब 16000 से अधिक पेंशनर है। अधिकांश पेंशनर इस विडोल कैशलेस स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हुए हैं और उनका प्रतिमा है 500 से 1000 कटौती की जा रही है। इस कंट्रीब्यूशन राशि का ऑडिट कराया जाए।
यह की कैशलेस सुविधा जिन भी हॉस्पिटलों को रिकॉग्नाइज किया गया है रोगी द्वारा उन हॉस्पिटलों में जाकर अगर इलाज कराया जाता है तो समय पर भी विडाल कंपनी द्वारा उचित तत्काल सेवाएं नहीं दी जा रही है, उल्टा रोगी को परेशान किया जाता है कि आपके द्वारा पूर्व में सूचना नहीं दी गई।
जबकि रोगी का विड्रोल कार्ड जो बनाया जाता है उसके माध्यम से ही रोगी संबंधित अस्पताल में भर्ती होता है और अपना इलाज करता है। इलाज के दौरान जो भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जाना चाहिए उस पर भी कटौती की जाती है। रोगी को हर संभव उसे अस्पताल में भुगतान करने के लिए बाध्य होना पड़ता है, जिससे पेंशनर के अंदर बहुत निराशा हो रही है। कैशलेस योजना का क्या मतलब,,अकारण संबद्ध अस्पतालों में पेमेंट करना पड़ता है और विड्रोल का उचित सहयोग प्राप्त नहीं हो पता है।
हमारे यहां बैठे हुए ट्रांसमिशन के कुछ अधिकारी वास्तव में इस योजना के सर्वे सर्वा हैं अथवा विडल की अथवा इस योजना में उनकी अहम भूमिका है यह स्पष्ट नहीं हो पाती है। क्योंकि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के संबंध के जो देयक/ बिल आदि जो है विद्युत मंडल की लेखा इकाई से ही पास भुगतान होते हैं,, उसे पर एक तरफ कटौती कर बहुत मनमानी की जा रही है लोगों में आक्रोश और आसंतोष व्याप्त है,,??
विडल हेल्थ चेकअप आदि के लिए परामर्श के लिए 70-72 साल के पेंशनर विड्रॉल के कार्यालय अगर जाते हैं तो उन्हें वहां बैठने की कोई सुविधा नहीं है, बल्कि एक विंडो खिड़की बना दी गई है वहां खड़े होकर उन्हें अपनी बात रखना होती है और उन्हें सही प्रति उत्तर नहीं मिल पा रहा है जिससे रोजी पेंशनरों में निराशा हैं।
हितग्राहियों को कैशलेस बॉडी हेल्थ चेकअप साल में एक बार दिया जाता था,,?? जिसे बिना जानकारी के 2 साल में एक बार कर दिया गया है,, जो कि अपने आप में एक प्रश्न खड़ा करता है। और लोगों को परेशानियां हो रही है। विडल द्वारा कालखंड के बीच में बिना जानकारी दिए माता-पिता को दी जा रही चिकित्सा सुविधा को भी एक तरफ बंद कर दिया गया है, जिस पर
संगठनों से कोई चर्चा नहीं की गई इससे संपूर्ण प्रदेश के अंदर असंतोष व्याप्त है। विडल द्वारा कैशलेस सुविधा के कि समस्याओं को हल करने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है पेंशनर खिड़कियों पर खड़े रहते हैं उसे समय पर उनके चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक में कटौती की जा रही है, और समय पर बिल पास नहीं हो रहे हैं जिससे प्रदेश में असंतोष व्याप्त है।
एक बात बार-बार प्रकाश में आ रही है कि चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने में कुछ मुंह देख देख कर व्यक्ति विशेष लोगों को ज्यादा लाभ पहुंचाया जा रहा है और उनकी चिकित्सा में भारी भरकम खर्च भी किया जा रहा है,, यहां पर मांग की जा रही है कि अभी तक 7 लाख से अधिक खर्च वाले रोगियों के नाम उजागर किए जाएं।
हाईएस्ट चिकित्सा प्रतिपूर्ति मद में किसका नाम है उस उन्नामों को भी प्रकाशित किया जाए,,? पेंशनरों को पीएसयू पैटर्न पर इलाज को सरलीकृत किया जाए। दंत चिकित्सा और आंखों के चिकित्सा विस्तार किया जाए सुविधाओं के लिए डॉक्टर हॉस्पिटल की लिस्ट प्रकाशित की जाए तुरंत कार्रवाई की जाए,, ताकि लोगों को समय बुजुर्ग लोगों को दांत और आंखों की चिकित्सा का लाभ मिल सके।
जिस प्रकार की जानकारी कैशलेस मेडिकल सुविधा मैं खर्च की राशि के संबंध में विडल में दी जा रही है, कि पिछले साल तकरीबन 40 करोड रुपए का खर्च आया और इस वर्ष 45 करोड रुपए का खर्च बताया जा रहा है,,?? क्योंकि बहुत अधिक प्रतीत होता है,,??
आपसे निवेदन है कि पिछले इन दो वर्षों में जिन रोगियों का हाईएस्ट चिकित्सा आपूर्ति खर्च आया है उनके नाम प्रकाशित किए जाएं। विडाल कंपनी को निर्देशित किया जाए कि वह के वह बुजुर्ग पेंशनरों से स्वास्थ्य संबंधी उपचार संबंधी जो जानकारी लेने उनके कार्यालय में जाते हैं वहां पर बैठने की व्यवस्था उत्तम रूप से की जाए,,
खिड़की पर खड़े होकर बात करने कीअब उन पेंशनरों में शक्ति नहीं है। आंखों के इलाज की सुविधा एक तरफा बंद कर दी गई है, जिससे पूरे प्रदेश में असंतोष व्याप्त है, और इसकी विधि वत जानकारी किसी भी संगठन को अथवा पेंशनर्स एसोसिएशन को नहीं दी गई है इससे प्रदेश में लोग भ्रमित हैं और आंखों का इलाज नहीं मिल पा रहा है,,??
कालखंड प्रारंभ होने के पश्चात किसी भी सुविधा को बीच में पूर्ण जानकारी के बंद ना किया जाए वापस ना लिया जाए, और पूर्व की भांति माता-पिता की स्वास्थ्य सेवाएं बहाल की जाए,? मध्य प्रदेश विद्युत मंडल में प्रारंभ की जा रही कैशलेस चिकित्सा योजना को अक्षरस:से लागू किया जाए जिसमें ₹2000 में प्रतिमा है कटौती पर 25 लाख तक का इलाज सुविधा प्रदान की जाए, जिस प्रकार जानकारी आ रही है कि पिछले वित्तीय वर्ष में 40 करोड़ से अधिक का खर्च हुआ है, इस वित्तीय वर्ष में 45 करोड़ से अधिक का खर्च हुआ है ,,??
कृपया उपरोक्त दोनों वित्तीय वर्षों में खर्च की गई राशि 40 करोड़ 45 करोड़ का किसी मेडिकल बोर्ड से तथा एजी ऑडिट से ऑडिट कराया जाए ताकि ट्रांसपेरेंसी बनी रहे आपका बहुत-बहुत धन्यवाद,







