Registrar Suspended Chhattisgarh नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल की रजिस्ट्रार दुर्गावती उसारे (कुंजाम) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया है। शासन द्वारा जारी आदेश में उन पर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन का खेल (Fraudulent Activities)
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, दुर्गावती उसारे पर आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग कॉलेजों को Forged Documents (कूटरचित दस्तावेजों) के आधार पर पंजीयन (Registration) हेतु प्रस्तावित किया। शासन की जांच में पाया गया कि उन्होंने तथ्यों को छुपाकर भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है।
पद का दुरुपयोग और नियम विरुद्ध कार्य (Misuse of Power)
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि रजिस्ट्रार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए Service Rules (सिविल सेवा आचरण नियम, 1965) का खुला उल्लंघन किया है। उनके खिलाफ मिली शिकायतों की पुष्टि होने के बाद राज्य शासन ने उन्हें Immediate Effect (तत्काल प्रभाव) से सस्पेंड करने का निर्णय लिया।
निलंबन की मुख्य बातें (Key Points of Suspension):
- दोहरा प्रभार छिन गया: उसारे रजिस्ट्रार के साथ-साथ शासकीय जी.एन.एम. कॉलेज, कांकेर की प्राचार्य (Principal) भी थीं। उन्हें दोनों ही प्रभारों से मुक्त कर दिया गया है।
- मुख्यालय बदला गया: निलंबन की अवधि में उनका Headquarters (मुख्यालय) मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय, जिला रायपुर निर्धारित किया गया है।
- कड़ी पाबंदी: वे सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी।
- नियमों के तहत कार्रवाई: यह निलंबन छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत किया गया है।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance Policy)
राज्य शासन की इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि नर्सिंग कॉलेजों के पंजीयन में किसी भी प्रकार की Irregularity (अनियमितता) को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आगामी दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की Possibility (संभावना) है।
चतुर विचार: सरकारी दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विभाग ने ठोस सबूतों के बाद ही यह Strict Action लिया है। स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए ऐसी कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जा रही है। चतुरपोस्ट इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

