CG विधानसभा के सत्र के बीच अनिश्विकालीन हड़ताल पर चले गए अधिकारी और कर्मचारी: प्रशासन पर लगाया यह आरोप  

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CG  रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में इधर विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ उधर विश्‍वविद्यलय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए केवीके के अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अधिकारी व कर्मचारी अपनी वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान और वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली को लेकर जारी आंदोलन सोमवार से अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल सह धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए हैं।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह और महासचिव डॉ. पूर्णेन्द्र देव वर्मा ने बताया कि इससे पहले 16 से 20 फरवरी 2026 तक पांच दिनों कामबंद हड़ताल किया गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षा की जारी थी कि वह हमारी मांगों पर स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध समाधान करेगा, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी तरह वैधानिक और न्यायोचित निर्णय नहीं। इसकी वजह से विवश होकर संघ को आंदोलन को अनिश्चितकालीन स्वरूप देना पड़ा।

वार्ता निष्कर्षहीन, जिम्मेदारी से बचता रहा प्रशासन

पांच दिवसीय हड़ताल के दौरान संघ की तरफ से विश्वविद्यालय प्रशासन से कई दौर की चर्चा की गई, लेकिन कुलपति स्तर पर जिम्मेदारी से बचने वाला रुख अपनाया गया। कभी विषय को राज्यपाल और राज्य शासन से जोड़कर चर्चा टाल दी गई, तो कभी वित्त विभाग का हवाला देकर वार्ता को उलझाया गया। इसकी वजह से कोई ठोस, लिखित और क्रियान्वयन योग्य निर्णय सामने नहीं आया।

न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी

संघ ने स्पष्ट किया कि केवीके कर्मचारियों के वेतन और सेवा-लाभों के संबंध में केंद्रीय स्तर पर स्पष्ट वैधानिक निर्देश पहले से उपलब्ध हैं, जिनमें

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मूल निर्देश (1997) अनुसार केवल 75′ (पे, डीए और एचआर) का अंशदान परिषद द्वारा और बाकी 25′ दायित्तव मेजबान संस्था का होना।

केंद्रीय कृषि मंत्रियों और सचिव स्तर के पत्र साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के  24 जून 2025 का स्थगन आदेश और उसके अनुपालन में विश्वविद्यालय का 7 अगस्त 2025 को जारी स्वयं का पत्र शामिल है।

इन सभी के बावजूद आज  तक पूर्ववत वेतन और भत्तों का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, जो न्यायालयीन आदेश की अवहेलना के समान है।

किसानों पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

नेशनल फोरम ऑफ केवीके व एआईसीआरपी के अध्यक्ष डॉ. मनोज शर्मा ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट कहा है कि कृषि विज्ञान केंद्रों की हड़ताल का सीधा नकारात्मक प्रभाव किसानों, कृषि विस्तार सेवाओं और राज्य की कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि केवीके के अधिकारी/कर्मचारी विश्वविद्यालय की अमानत हैं, आईसीएआर की नहीं, और उनके समस्त वेतन व सेवा-लाभों की जिम्मेदारी मेजबान विश्वविद्यालय की है।

संघ पुन: स्पष्ट करता है कि यह आंदोलन पूर्णत: शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं अनुशासित है। कर्मचारियों के सम्मान, आजीविका एवं वैधानिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्त प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं प्रसारगत अव्यवस्थाओं की पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

संघ एक बार फिर कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल, स्पष्ट व लिखित निर्णय लेकर केवीके कर्मचारियों के पूर्ण वेतन और सभी वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली सुनिश्चित करने की मांग करता है. ताकि आंदोलन समाप्त हो और किसानों को पुन: निर्बाध सेवाएं मिल सकें।

chatur postFebruary 23, 2026
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