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CGMCL छत्‍तीसगढ़ में शराब दुकानों के लिए टेंडर जारी होते ही उठे सवाल: 300 करोड़ के ठेके में…

Liquor price

CGMCL रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMCL) ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य की सरकारी देशी, विदेशी व प्रीमियम शराब दुकानों के संचालन के लिए मैन पावर (मानव संसाधन) उपलब्ध कराने के लिए टेंडर जारी किया है। इस बार सीजीएमसीएल ने 3 साल के लिए यह टेंडर जारी किया है। टेंडर भरने की अंतिम तिथि 19 मार्च 2026 है। इसी दिन टेंडर खोला जाएगा।

अनुभव से ज्‍यादा टर्न ओवर पर जोर

मैन पावर सप्लाई का टेंडर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए के मुताबिक तीन साल के लिए करीब 300 करोड़ रुपए का है। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि इस बार के टेंडर में अनुभव से ज्यादा टर्नओव्हर पर जोर दिया गया है।

जानिए- छत्‍तीसगढ़ में कितनी शराब दुकानें

छत्‍तीसगढ़ में देशी, विदेशी व प्रीमियम शराब दुकानों की संख्या 676 है। नए वित्तीय वर्ष में 67 दुकानें और खोले जाने का निर्णय लिया गया है। आने वाले समय में दुकानों की संख्या 700 के करीब पहुंच जाएंगी।

चार हजार कर्मचारियों की पड़ेगी जरुरत

इन दुकानों के संचालन के लिए कम से कम चार हजार कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। चूंकि दुकानों का संचालन राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम (सीजीएमसीएल) द्वारा किया जाता है, लिहाजा मैन पावर की उपलब्धता टेंडर के द्वारा होती है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो सालों के लिए मैन पावर सप्लाई का टेंडर जारी हुआ था, तब विभाग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास था। इस दौरान मैन पावर सप्लाई टेंडर में अनुभव को प्राथमिकता दी गई थी और टर्नओव्हर भी कुल टेंडर का 30 प्रतिशत रखा गया था, जो नियमानुसार था।

कुछ शर्तों को लेकर हैरानी भी

आबकारी सूत्रों का कहना है कि पिछले मैन पावर सप्लाई टेंडर और वर्तमान में जारी मैन पावर सप्लाई टेंडर में कई तरह की त्रुटियां नजर आ रहीं हैं। पिछली बार मैन पावर टेंडर में ईपीएफ जमा करने वाले रजिस्टर्ड कर्मचारियों के अनुसार ही अंक दिए गए थे, लेकिन इस बार के टेंडर में इस शर्त को ही हटा दिया गया है। जिसे लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं, जिसके आने वाले दिनों में एक बड़ी समस्याएं बनने की आशंका जताई जा रही है।

कैबिनेट में नहीं हुआ टेंडर का निर्णय

आबकारी सूत्रों का कहना है कि मैन पावर सप्लाई के टेंडर का निर्णय कैबिनेट में नहीं हुआ है। कमेटी ने टर्नओव्हर भी 300 करोड़ रखा है, जो भारत सरकार के सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के नियमों के विपरीत है इसलिए इस टेंडर और सार्वजनिक उपक्रम में भविष्य में सीवीसी की विपरीत नजर पड़ने की संभावना भी है। इससे पहले भी पूर्व मुख्यसचिव अमिताभ जैन के खिलाफ इसी मुद्दों पर शिकायतें की गई, जिसकी जांच पीएमओ में लंबित है।

अनुभव से ज्यादा टर्नओव्हर पर जोर

आबकारी सूत्रों का कहना है कि मैन पावर सप्लाई के टेंडर में पिछली बार 1000 कर्मचारी के पीछे 4 अंक और 5000 कर्मचारी के पीछे 20 अंक निर्धारित थे। इसी तरह लाइसेंसी कर्मचारी की नियुक्ति के लिए 4 से 20 अंक निर्धारित थे। किसी सरकारी संस्थानों में सेवाएं देने वाली मैन पावर कंपनी के अनुभव को भी अंकों के आधार पर प्राथमिकता दी गई थी। इसके अलावा टर्नओव्हर पर अंक प्रदान किए जाते थे। किंतु नए टेंडर में केवल टर्नओव्हर को प्राथमिकता में रखा गया है। शेष तीनों शर्तें हटा ली गई हैं। इससे मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनियां हतप्रभ हैं।

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