रायपुर (Chaturpost Exclusive): क्या छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू होने वाला है? ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (Women Reservation Act) को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष सत्र (Special Session) आगामी 30 अप्रैल को बुलाया गया है। राज्य सरकार इस सत्र में महिलाओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, जिसने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल
छत्तीसगढ़ में 30 अप्रैल को होने वाला यह सत्र महज एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए महिला आरक्षण (Women Reservation) से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने की पृष्ठभूमि में लाया जा रहा है। एक तरफ जहां राज्य सरकार महिलाओं के विकास के लिए नए द्वार खोलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Indian National Congress) ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस इस सत्र के दौरान अपने अधिक से अधिक महिला विधायकों को बोलने का अवसर (Opportunity) प्रदान करेगी ताकि वे अपनी बात मुखरता से रख सकें।
सड़क से सदन तक महिला शक्ति का प्रदर्शन
राजनीतिक पारा (Political Temperature) इस कदर चढ़ा हुआ है कि भाजपा महिला मोर्चा ने प्रदेश स्तर पर ‘आक्रोश रैली’ (Protest Rally) निकालकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस केवल राजनीति कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि वे महिलाओं को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पीसीसी ने जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) कर भाजपा पर महिलाओं के नाम पर केवल राजनीति (Politics) करने का पलटवार किया है।
आंकड़ों की जुबानी: सदन में महिलाओं की स्थिति
छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Legislative Assembly) के गठन के बाद से सदन में महिला प्रतिनिधियों की संख्या में क्रमिक सुधार देखने को मिला है। यदि हम इतिहास पर नजर डालें:
- वर्ष 2003: सदन में केवल 6 महिला विधायक थीं।
- वर्ष 2008: यह संख्या 6 ही रही।
- वर्ष 2013: महिला विधायकों की संख्या 11 हुई।
- वर्ष 2018: इसमें और वृद्धि हुई और संख्या 13 तक पहुँची।
- वर्तमान स्थिति (2025-26): अब सदन में कुल 19 महिला विधायक हैं, जो सदन की कुल संख्या का लगभग 21% हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के आने के बाद यह आंकड़ा 33% तक पहुंच सकता है, जो महिला नेतृत्व (Women Leadership) के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
विपक्ष और सरकार का आधिकारिक पक्ष (Official Stand)
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस सदन की कार्यवाही में अनिवार्य रूप से भाग लेगी। उन्होंने कहा, “हमें विधानसभा में शासकीय कार्य (Government Business) के संबंध में सूचना मिली है। हम यह देखना चाहते हैं कि सरकार सदन के पटल पर विषय को किस तरह पेश करती है, क्योंकि पहले निंदा प्रस्ताव लाने की चर्चा थी।”
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि एक दिन के इस विशेष सत्र में पूरा ध्यान महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) और उनके अधिकारों पर होगा। सभी सदस्य महिला विधायकों को आगे बढ़ाने और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास पर अपनी बात रखेंगे।
लोकसभा की हार-जीत का असर
हाल ही में लोकसभा (Lok Sabha) में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पर हुए मत विभाजन (Division of Votes) ने नई बहस छेड़ दी है। इस विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे। चूंकि यह पूर्ण बहुमत से पारित नहीं हो सका, इसलिए अब राज्यों की विधानसभाओं में इसे लेकर प्रस्ताव पारित कर केंद्र पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र भी 27 अप्रैल को बुलाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ 30 अप्रैल को इस पर चर्चा करेंगे।
आधी आबादी के लिए अधिकारों की नई जंग
छत्तीसगढ़ विधानसभा का यह विशेष सत्र राज्य की आधी आबादी के लिए अधिकारों की नई जंग का केंद्र बनने वाला है। जहाँ सरकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करेगी, वहीं विपक्ष इसे चुनावी स्टंट करार देने की कोशिश करेगा। हालांकि, इन सबके बीच सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि राजनीति के केंद्र में ‘महिला’ और उनके ‘अधिकार’ आ गए हैं। आने वाले 30 अप्रैल को होने वाली चर्चा न केवल छत्तीसगढ़ की राजनीति की दिशा तय करेगी, बल्कि देश में महिला आरक्षण की जमीन को और मजबूत करेगी।
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