Chhattisgarh छत्तीसगढ़ में 15 साल की सेवा के बाद बाहर कर दिए गए 89 इंजीनियर: सरकार से पूछ रहे- हमारी क्‍या गलती, कहां जाएं…

schedule
2026-02-09 | 15:46h
update
2026-02-09 | 15:46h
person
chaturpost.com
domain
chaturpost.com

Chhattisgarh  रायपुर। छत्तीसगढ़ में 89 सब इंजीनियरों के सामने रोजी- रोटी का संकट खड़ा हो गया है। 15 साल की नियमित सेवा के बाद अचानक उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया है। लगभग सभी की दूसरी नौकरी की उम्र निकल चुकी है। संकट में फंसे इंजीनियरों ने सरकार से गुहार लगाई है।

कोर्ट के आदेश पर गई नौकरी

दरअसल, इन 89 इंजीनियरों की नौकरी कोर्ट के आदेश की वजह से संकट में पड़ गई है। इंजीनियर सरकार से इस मामले में पुर्नविचार याचिका दाखिल करने की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री, मुख्य सचिव और विभागीय सचिव को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है।

छत्तीसगढ़ डिप्लोमा इंजीनियर्स ने संभाला मोर्चा

अखिल भारतीय डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के जोनल सेक्रेटरी प्रमोद कुमार नामदेव, छत्तीसगढ़ डिप्लोमा इंजीनियर्स के प्रांताध्यक्ष इंजी. आलोक नागपुरे महामंत्री प्रकाश सिंह ठाकुर और कार्यालय मंत्री इंजी. चंद्र्रहास साहू ने उपरोक्त निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह निर्णय न्याय के मूलभूत सिद्धांत  ‘भले ही कोई दोषी सजा से बच जाए लेकिन किसी भी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं मिलनी चाहिए की भावना के विपरीत है।

2010-11 में शुरू हुई थी भर्ती की प्रक्रिया

संगठन के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि विभाग की तरफ से वर्ष 2010-2011 में उप अभियंता के 275 रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विज्ञापन में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के साथ यह भी स्पष्ट किया था कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति के पूर्व अपने सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा साथ  पात्रता, अपात्रता का निर्णय विकास आयुक्त करेंगे।

समय पर नहीं आए ताेे इन्‍हें मिला मौका

इसी आधार पर नियुक्ति के पूर्व समस्त दस्तावेज उपलब्ध हो जाने की प्रत्याशा में डिप्लोमा के अंतिम वर्ष और बीई के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने इन पदों के लिए आवेदन किया। व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल होकर सफलता के साथ वरिष्ठता सूची में स्थान प्राप्त किया। दस्तावेज सत्यापन के निर्धारित तिथि में परीक्षा परिणाम न आने और अंकसूची उपलब्ध न होने के कारण वे अपना दस्तावेज सत्यापन के लिए उपस्थित नहीं हुए। विभाग की तरफ से दस्तावेज सत्यापन के बाद अंतिम सूची जारी की गई जिसमें इनके नाम के समक्ष अंतिम वर्ष की सूची प्रस्तुत नहीं करने का कारण बताया गया।

सरकार की अनुमति के बाद आया था कॉल

विकास आयुक्त रायपुर ने सचिव छत्तीसगढ़ शासन से अनुमति प्राप्त करने के बाद सभी अभ्यर्थियों को फिर पत्र द्वारा सूचित करते हुए दस्तावेज सत्यापित करन के लिए उपस्थित होने को कहा गया। सभी दस्तावेजों के सत्यापन के पश्चात उन्हें उप अभियंता पद पर नियुक्ति प्रदान की गई जिसके तहत विगत 15 वर्षों से विभाग में निरंतर अपनी सेवा दे रहे हंै। स्पष्ट है कि उपरोक्त प्रक्रिया के लिए अभ्यर्थियों का किसी प्रकार का दोष नहीं है और न ही उन्होंने कोई अपराध किया है।

दूसरी नौकरी मिली तो विभाग ने नहीं दिया एनओसी

उक्त 89 उप अभियंताओं को यदि सत्यापन के दौरान अपात्र घोषित करते हुए उन्हें नियुक्ती प्रदान नहीं की जाती तो वे उस समय अन्य परिक्षाओ में शामिल होकर नौकरी के लिए अन्य विकल्पो का सहारा ले सकते थे। कई उपअभियंता अन्य परीक्षा में शामिल भी हुए और उनका चयन अन्य विभागों में भी हुआ लेकिन विभाग द्वारा अनापत्ती प्रमाण पत्र प्रदान न करने के कारण वे वहां अपनी उपस्थिति नहीं दे सके।

सरकार से पूछा- अब कहां जाएं

15 वर्षों बाद अचानक उनकी नियुक्ति को निरस्त करने के कारण उनके समक्ष बेरोजगारी का संकट आ गया है, 15 वर्ष पूर्व वे 20-22 वर्ष के युवा थे आज 37 से 40 वर्ष के हो चुके है। उनके उपर माता पिता, पति-पत्नी व बच्चों के पालन पोषण की जवाबदारी आ चुकी है, वे शासकीय नौकरी प्राप्त करने की अधिकतम आयु सीमा को पार कर चुके है अत: अब उनके पास नौकरी करने का कोई अन्य विकल्प नहीं है। विभाग द्वरा प्रक्रियाओं में त्रुटी के कारण उप अभियंता परिवार के लगभग 400 सदस्यों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

chatur postFebruary 9, 2026
3 3 minutes read
Follow Us
Imprint
Responsible for the content:
chaturpost.com
Privacy & Terms of Use:
chaturpost.com
Mobile website via:
WordPress AMP Plugin
Last AMPHTML update:
09.02.2026 - 15:51:04
Privacy-Data & cookie usage: