रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘महिला आरक्षण’ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने के ऐलान ने राज्य में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जहाँ सरकार विपक्ष के खिलाफ सदन में मोर्चा खोलने की तैयारी में है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद तीखा और व्यक्तिगत तंज कसकर हमले को धार दे दी है।
विपक्ष के खिलाफ ‘निंदा प्रस्ताव’ की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि छत्तीसगढ़ सरकार इसी महीने विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने जा रही है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के रुख की आलोचना करना है। साय के मुताबिक, सदन में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो यह विशेष बैठक 27 अप्रैल को हो सकती है।
भूपेश बघेल का हमला: “कौशल्या भाभी को बना दीजिए मुख्यमंत्री”
भाजपा के इस दांव पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित करते हुए बघेल ने तंज कसा, “विष्णु जी, अगर आपको (महिलाओं की) इतनी ही तकलीफ है, तो कौशल्या भाभी (सीएम की पत्नी) को ही मुख्यमंत्री बना दीजिए।”
बघेल ने भाजपा के वैचारिक संगठनों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसंघ, आरएसएस और भाजपा ने कभी भी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में आने का मौका नहीं दिया।
इतिहास के बहाने घेराबंदी
भूपेश बघेल ने महिला आरक्षण का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देते हुए कहा कि:
- 1989 की बाधा: राजीव गांधी ने ही महिलाओं को आरक्षण देने की सबसे पहले पहल की थी, लेकिन तत्कालीन भाजपा समर्थित ताकतों ने अड़ंगा लगाया था।
- पंचायती राज का दम: मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज लागू किया, जिसके बाद 1995 के चुनावों से लाखों महिलाएं राजनीति में आईं।
- कांग्रेस का रुख: बघेल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा से ही महिला आरक्षण की सच्ची हितैषी रही है।
विशेष सत्र की प्रक्रिया
बता दें कि विशेष सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री और कैबिनेट के फैसले के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाता है। राजभवन से स्वीकृति मिलते ही सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर हुए विवाद के बाद भाजपा की ‘आक्रोश रैली’ और अब साय सरकार का यह ‘विशेष सत्र’ दांव आगामी राजनीति की दिशा तय करेगा।

