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बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए अब पंचायतों में बनेगी रणनीति, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

Chhattisgarh Climate Action

रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मुख्य सचिव विकासशील ने स्पष्ट किया है कि अब जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई केवल कागजों या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सीधे गांव की चौपाल यानी ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) स्तर तक ले जाया जाएगा।

राज्य सरकार की इस नई पहल से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों की पारिस्थितिकी सुधरेगी, बल्कि कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) जैसे कार्यक्रमों के जरिए भविष्य में आर्थिक लाभ के रास्ते भी खुलेंगे। मुख्य सचिव ने सीएसआर (CSR) फंड का उपयोग भी इसी दिशा में करने का प्रस्ताव दिया है, जो राज्य के विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

जलवायु परिवर्तन पर स्टियरिंग समिति की महत्वपूर्ण बैठक

हाल ही में मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में ‘छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना’ (State Action Plan on Climate Change) के लिए गठित स्टियरिंग समिति की उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के भविष्य को पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) बनाने के लिए कई तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर गहन चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला (Resilient) बनाने के लिए पंचायतवार सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता और स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

वृक्ष-आवरण (Tree Cover) में छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास

छत्तीसगढ़ के लिए सबसे गर्व की बात यह है कि राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि ISFR 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष-आवरण (Forest and Tree Cover) में रिकॉर्ड 683 किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पूरे देश में सर्वाधिक है, जिसके चलते छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर काबिज हो गया है।

इस सफलता के पीछे राज्य सरकार की प्रभावी योजनाएं हैं:

  1. एक पेड़ माँ के नाम: इस अभियान के तहत राज्य में लगभग 7 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है।
  2. किसान वृक्ष मित्र योजना: इसके माध्यम से 3 करोड़ 68 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए हैं।

कार्बन क्रेडिट और हरित ऊर्जा (Green Energy) पर फोकस

राज्य सरकार अब ‘कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों’ (Carbon Credit Based Programs) के क्रियान्वयन पर गंभीरता से विचार कर रही है। इससे उन किसानों और पंचायतों को लाभ मिलेगा जो वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा, परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए ई-वाहनों (Electric Vehicles) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कृषि क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। किसानों को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए सोलर पंप (Solar Pumps) वितरित किए जा रहे हैं। साथ ही, जैविक खेती (Organic Farming) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती का विस्तार किया गया है।

जल संसाधन और बुनियादी ढांचा (Infrastructure) प्लानिंग

जलवायु परिवर्तन का सीधा असर जल स्रोतों पर पड़ता है। इसे देखते हुए राज्य के 300 से अधिक बांधों की हाइड्रोलॉजिकल प्लानिंग (Hydrological Planning) की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि 24 बड़े और मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे (Sedimentation Survey) पूरा कर लिया गया है, जिससे जल भंडारण क्षमता का सही आकलन हो सकेगा।

बैठक में ‘जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र’ (Climate Change Knowledge Centre) के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया, जो शोध और जागरूकता के लिए एक हब के रूप में कार्य करेगा।

इन विभागों की रही सक्रिय भागीदारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन के लगभग सभी प्रमुख विभागों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट साझा की। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन के कारकों और छत्तीसगढ़ पर इसके नकारात्मक प्रभावों (Negative Impacts) के बारे में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, कृषि, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, खनिज, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। साथ ही नाबार्ड (NABARD), सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के विशेषज्ञों ने भी तकनीकी सुझाव साझा किए।

निष्कर्ष (Conclusion)

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य को ‘नेट जीरो’ (Net Zero) लक्ष्यों की ओर ले जाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। ग्राम पंचायत स्तर पर कार्ययोजना बनाने से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। यदि छत्तीसगढ़ इसी गति से वृक्षारोपण और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ता रहा, तो वह दुनिया के सामने सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Sustainable Development) का एक बेहतरीन मॉडल पेश करेगा।

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