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बड़ी खबर: बिजली कंपनी प्रमोशन विवाद में सुको में सुनवाई, अब इस दिन होगी अगली पेशी; कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

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Chhattisgarh Electricity News रायपुर । छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों (State Power Companies) में पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) को लेकर जारी कानूनी लड़ाई अब और खिंच गई है। देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 10 अप्रैल को होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई टल गई है। अब इस संवेदनशील मामले पर मई के पहले सप्ताह में मंथन होगा।

सुप्रीम कोर्ट अपडेट: 10 अप्रैल को क्या हुआ?

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ द्वारा दायर याचिका पर 10 अप्रैल 2026 को सुनवाई की तारीख (Hearing Date) तय थी। हालांकि, किन्हीं कारणों से कोर्ट में इस मामले पर बहस नहीं हो सकी। केस डायरी के अनुसार, कोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 5 मई 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

पदोन्नति विवाद: आखिर पेच कहां फंसा है?

दरअसल, यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले से शुरू हुआ जिसमें पदोन्नति में आरक्षण को अनुचित करार दिया गया था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि:

इसी फैसले को चुनौती देने के लिए आरक्षित वर्ग संघ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। कोर्ट ने फिलहाल प्रक्रिया जारी रखने को कहा है, लेकिन हर प्रमोशन ऑर्डर में यह लिखना अनिवार्य है कि यह अंतिम फैसले के अधीन (Subject to Final Outcome) होगा।

कर्मचारियों का उग्र आंदोलन: सामूहिक इस्तीफे की धमकी

इधर, कोर्ट की तारीखें बढ़ने और प्रबंधन की कार्यप्रणाली से नाराज ‘छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ’ ने आंदोलन (Protest) शुरू कर दिया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर आरएल ध्रुव और महासचिव विजय नाग ने प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

आंदोलन का पूरा शेड्यूल (Protest Schedule):
  • आज (17 अप्रैल 2026): रायपुर मुख्यालय में बड़ा प्रदर्शन किया जा रहा है।
  • 20 अप्रैल 2026: प्रदेश भर के आरक्षित वर्ग के कर्मचारी एक साथ सामूहिक अवकाश (Mass Leave) पर रहेंगे।
  • 27 अप्रैल 2026: इस दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल (Indefinite Strike) शुरू होगी।

अवमानना याचिका का भी है पेंच

कानूनी कार्यवाही के बीच एक अवमानना याचिका (Contempt Petition No. 494/2025) भी लंबित है। यह याचिका 24 फरवरी 2025 के अदालती आदेश के कथित उल्लंघन (Violation) को लेकर दायर की गई है। इसमें कुछ शीर्ष अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है, जिनसे जवाब मांगा गया है।

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