
कोरबा। छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनियों (State Power Companies) में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों (Pending Demands) को लेकर एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध बिजली उत्पादन कर्मचारी संघ ने शुक्रवार को दर्री एचटीपीएस (Darri HTPS) के सामने विशाल आमसभा कर हुंकार भरी।
कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी (Warning) दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान (Solution) नहीं निकाला गया, तो पूरे प्रदेश में बिजली कर्मचारी कामबंद हड़ताल (Work-off Strike) पर चले जाएंगे।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर फंसा पेंच
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे मुख्य केंद्र पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) है। कर्मचारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 अप्रैल 2022 से राज्य के अन्य कर्मचारियों के लिए OPS लागू कर दी है। बिजली कंपनियों ने भी इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है, लेकिन वास्तविकता (Reality) यह है कि अब तक इसके लिए कोई औपचारिक आदेश (Official Order) जारी नहीं किया गया है।
“प्रबंधन कई बार आश्वासन (Assurance) दे चुका है, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश (Resentment) व्याप्त है।”
आवास व्यवस्था पर छिड़ा विवाद
कर्मचारियों ने कंपनी के हालिया आदेश पर भी कड़ी आपत्ति (Objection) जताई है। नए निर्देश के अनुसार, कर्मचारियों को उसी प्लांट के आवासीय परिसर (Residential Colony) में रहने को कहा जा रहा है जहाँ वे कार्यरत हैं।
समस्या का कारण (Reason for Issue):
- कोरबा पूर्व और पश्चिम संयंत्रों के बीच की दूरी महज 8 किलोमीटर है।
- कर्मचारी सालों से वर्तमान आवास में रह रहे हैं, जहाँ उनके बच्चों की शिक्षा (Education) और पारिवारिक व्यवस्थाएं जुड़ी हैं।
- जबरन आवास बदलवाना अव्यावहारिक (Impractical) निर्णय है, जिसे तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।
अधिकारियों को फायदा, कर्मचारियों की अनदेखी?
संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी प्रबंधन (Management) भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है। अधिकारियों को तकनीकी भत्ता दिया जा रहा है, जबकि जो कर्मचारी जमीन पर तकनीकी कार्य (Technical Work) कर रहे हैं, उन्हें इससे वंचित रखा गया है। इसके अलावा, कंप्यूटर भत्ता (Computer Allowance) की मांग भी लंबे समय से ठंडे बस्ते में है।
हस्ताक्षर अभियान से बढ़ेगा दबाव
आने वाले दिनों में आंदोलन (Agitation) को और तेज करने के लिए बिजली कर्मचारी प्रदेश स्तर पर हस्ताक्षर अभियान (Signature Campaign) चलाने वाले हैं। शुक्रवार को कोरबा पश्चिम स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय के पास आयोजित सभा के बाद प्रबंधन को ज्ञापन (Memorandum) सौंपा गया।
कर्मचारी नेताओं ने साफ कर दिया है कि यह केवल चेतावनी नहीं है, बल्कि हक की लड़ाई है। यदि 15 दिनों में निर्णय (Decision) नहीं हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।
इन दिग्गजों ने संभाली कमान
इस विरोध प्रदर्शन में केंद्रीय विद्युत क्षेत्र प्रभारी राधेश्याम जायसवाल, संघ के मंत्री सुरेश साहू, नवरत्न बरेठ, अजय मिश्रा, सीएस दुबे, सुरेश साहू, केदार राठौर, अमर राठौर, और मदनमोहन पांडेय सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महिला शक्ति के रूप में पूर्णिमा साहू और रंजिता बड़ा जैसे नामों ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
छत्तीसगढ़ में बिजली संकट न गहराए, इसके लिए सरकार और बिजली कंपनियों को जल्द ही मेज पर बैठकर इन मांगों पर विचार (Deliberation) करना होगा। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, उन्हें ठोस आदेश चाहिए।
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