रायपुर/चंडीगढ़: जनस्वास्थ्य (Public Health) के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। चंडीगढ़ में आयोजित दो दिवसीय National Summit on Innovation and Inclusivity में छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य रणनीतियों को देश की सर्वश्रेष्ठ नवाचारी पहलों (Innovative Initiatives) के रूप में चुना गया।
राज्य को यह सम्मान फाइलेरिया और मलेरिया जैसे गंभीर रोगों के उन्मूलन (Elimination) के लिए अपनाई गई शानदार और सटीक योजना के लिए दिया गया है।
BIHAN मॉडल: महिलाओं ने पेश की
मिसालफाइलेरिया अभियान में BIHAN (स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन) की महिलाओं ने कमाल कर दिया। इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर Best Practice माना गया है। महिलाओं के इस समूह ने न केवल दवाएं बांटीं, बल्कि समाज में फैली भ्रांतियों (Myths) को भी दूर किया।
इस मॉडल की बड़ी बातें:
74% लोग: जो पहले दवा खाने से मना कर रहे थे, उन्हें महिलाओं ने काउंसिलिंग के जरिए तैयार किया।
PCI India: इस अभियान में तकनीकी सहयोग (Technical Support) काफी महत्वपूर्ण रहा।
सामुदायिक भागीदारी: जनता के बीच से ही लीडर चुनकर दवा सेवन सुनिश्चित कराया गया।
मलेरिया मुक्त बस्तर:
दुर्गम जंगलों में जीती जंगबस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण और दूरस्थ क्षेत्रों (Remote Areas) में संचालित ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को विशेषज्ञों ने अनुकरणीय (Exemplary) बताया। इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत लक्षणहीन (Asymptomatic) मरीजों की पहचान करना रही।
कैसे मिली सफलता?
RDT किट: घर-घर जाकर रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (Rapid Diagnostic Test) से तुरंत जांच।
Follow-up: मरीजों का Day-7 और Day-14 पर लगातार फॉलो-अप लिया गया ताकि इलाज अधूरा न रहे।
चेन ब्रेक: लक्षणहीन मरीजों का इलाज कर संक्रमण की चेन को पूरी तरह तोड़ा गया।
आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की उपलब्धि (Growth Report)
स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता से राज्य के मलेरिया आंकड़ों में भारी गिरावट (Decline) दर्ज की गई है:
विवरण (Parameter), वर्ष 2019 (API), वर्ष 2025 (API)
पूरा छत्तीसगढ़,1.97, 0.90
बस्तर संभाग,13.12, 6.98
अन्य राज्यों के लिए बनेगा रोल मॉडल
सम्मेलन (Summit) में मौजूद नीति-निर्माताओं ने माना कि छत्तीसगढ़ का यह मॉडल कम लागत (Low Cost) में अधिक परिणाम देने वाला है।
भविष्य में अन्य राज्य भी मलेरिया और फाइलेरिया से लड़ने के लिए छत्तीसगढ़ की इस रणनीति (Strategy) को अपना सकते हैं।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी जनभागीदारी (Community Engagement) को प्राथमिकता देकर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।

