
रायपुर। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध) का सीधा असर अब छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र पर दिखने लगा है। कच्चे माल की किल्लत और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण प्रदेश के उद्योगों में उत्पादन 35% तक गिर गया है। इसका सबसे बड़ा झटका कंस्ट्रक्शन सेक्टर को लगा है, जहाँ महीने भर में सरिया की कीमतों में भारी उछाल आया है।
लोहा बाजार में उबाल: सरिया @61,000 प्रति टन
युद्ध के चलते सप्लाई चेन प्रभावित होने से लोहा बाजार गर्म है। पिछले एक महीने के भीतर सरिया की कीमतों में 4000 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- ताजा भाव: सरिया अब 61,000 रुपये प्रति टन के पार पहुंच गया है, जो पिछले डेढ़ साल का उच्चतम स्तर है।
प्रमुख कारण: गैस सिलेंडर की किल्लत और कच्चे माल (Raw Material) के दामों में वृद्धि।
उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन गर्ग के अनुसार, सिलेंडर न मिलने और उत्पादन घटने का सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
परिवहन और कच्चे माल का संकट
छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल नचरानी ने बताया कि ईंधन की उपलब्धता के दावों के बावजूद धरातल पर ट्रकों की कमी महसूस की जा रही है। माल डिस्पैच करने में देरी हो रही है और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी है।
महँगा हुआ कपड़ा बाजार
युद्ध की तपिश केवल लोहे तक सीमित नहीं है। पंडरी कपड़ा व्यवसायी संघ के पूर्व अध्यक्ष सुशील अग्रवाल के मुताबिक:
- कपड़ों की कीमतों में 10 से 30 प्रतिशत तक की तेजी आई है।
- व्यापारियों को मांग के मुकाबले केवल 80% माल ही मिल पा रहा है।
सराफा बाजार: सोने-चांदी की कीमतों में अनिश्चितता
रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। रायपुर में ताजा भाव कुछ इस प्रकार हैं:
| धातु | दर (रायपुर बाजार) |
| सोना (Standard) | ₹1,53,400 प्रति 10 ग्राम |
| चांदी | ₹2,40,000 प्रति किलो |
उद्योगपतियों का मानना है कि सरकार के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कच्चे माल की आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था को सुचारू करने के लिए ठोस हस्तक्षेप की आवश्यकता है।







