छत्तीसगढ़ शराब घोटाला टाइमलाइन: 2019 की ‘प्लानिंग’ से 2026 की ‘जब्ती’ तक, जानिए कब-क्या हुआ?
S. J. Kumar
शराब घोटाला क्रोनोलॉजी: 2019 से 2026 तक की पूरी कहानी
वर्ष 2019-2022: सिंडिकेट का गठन और अवैध कारोबार
2019: छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री के नियमों में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हुई। आरोप है कि इसी दौरान ‘सिंडिकेट’ ने आकार लिया।
2020-21: कोरोना काल और उसके बाद ‘पार्ट-B’ शराब (बिना रिकॉर्ड वाली) की बिक्री चरम पर पहुँची। डिस्टिलरी से सीधे दुकानों तक माल पहुँचाने का नेटवर्क सेट किया गया।
2022: आयकर विभाग (Income Tax) ने छत्तीसगढ़ के कई बड़े अधिकारियों और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से करोड़ों के लेनदेन के कच्चे चिट्ठे मिले।
वर्ष 2023: ED की एंट्री और पहली बड़ी गिरफ्तारियां
मार्च 2023: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मई 2023: रायपुर के मेयर के भाई अनवर ढेबर को पहली बार गिरफ्तार किया गया। इसके बाद आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी हुई।
जुलाई 2023: ED ने अपनी चार्जशीट में अनिल टुटेजा और निरंजन दास को मास्टरमाइंड बताते हुए 2000 करोड़ के घोटाले का दावा किया।
वर्ष 2024: नई सरकार और ACB/EOW की सक्रियता
जनवरी 2024: छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद नई भाजपा सरकार ने मामले की जांच ACB और EOW को सौंपी। FIR No. 04/2024 दर्ज की गई।
अप्रैल 2024: सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत खत्म होने के बाद पूर्व IAS अनिल टुटेजा को EOW ने गिरफ्तार किया।
जून-अगस्त 2024: कई डिस्टिलरी मालिकों और प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों से पूछताछ और गिरफ्तारियां हुईं।
वर्ष 2025: जांच का विस्तार और नई कड़ियां
2025: जांच का दायरा बढ़ा और अंतर्राज्यीय कड़ियों (जैसे झारखंड और अन्य राज्यों में शराब सप्लाई) की पड़ताल शुरू हुई। इस दौरान कई बेनामी संपत्तियों को कुर्क (Attach) किया गया।
वर्ष 2026 (वर्तमान): वाहनों की जब्ती और ‘पार्ट-B’ का खुलासा
मार्च 2026: ACB/EOW ने वेलकम और भाटिया डिस्टिलरी से उन 16 वाहनों को ज़ब्त किया, जिनका इस्तेमाल अवैध शराब ढोने में होता था।
वर्तमान स्थिति: केडिया डिस्टिलरी और अन्य निजी ट्रांसपोर्टरों की भूमिका की जांच जारी है। अब एजेंसियां उन ‘फाइनल बेनेफिशियरी’ तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं जिन्हें इस घोटाले का पैसा पहुँचा।