Liquor Scam रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, ‘सिंडिकेट’ के काले कारनामों के औजार भी अब कानून के शिकंजे में आ रहे हैं। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्ग जिले के कुम्हारी स्थित ‘छ.ग. डिस्टलरीज प्रा. लिमिटेड’ से 3 गाड़ियों को जब्त किया है।
जांच में यह साफ हुआ है कि इन वाहनों का इस्तेमाल सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली ‘पार्ट-बी’ (अवैध) शराब को खपाने के लिए किया जाता था।
भरोसेमंद ‘सारथी’ और अवैध शराब का खेल
EOW की विवेचना में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि डिस्टलरी मालिक अपने रसूख और भरोसेमंद करीबियों का इस्तेमाल कर इस अवैध नेटवर्क को चलाते थे।
- सीधी सप्लाई: इन गाड़ियों के जरिए डिस्टलरी से बिना किसी रिकॉर्ड के सीधे चुनिंदा सरकारी शराब दुकानों तक माल पहुंचाया जाता था।
- भरोसेमंद नेटवर्क: पकड़े जाने के डर से डिस्टलरी मालिकों ने अपने खास लोगों को ट्रांसपोर्टिंग का जिम्मा सौंप रखा था, जो छोटे ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों को इस अवैध खेल में झोंक देते थे।
स्क्रैप करा दी गईं कई गाड़ियां!
EOW को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि कुम्हारी डिस्टलरी में सिर्फ ये 3 गाड़ियां ही नहीं, बल्कि कई और गाड़ियां भी इस सिंडिकेट का हिस्सा थीं। सबूत मिटाने के लिए इनमें से कई गाड़ियों को या तो स्क्रैप (कबाड़) करवा दिया गया है या फिर उनका हुलिया बदलकर कहीं और इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्यूरो अब इन लुप्त हो चुके वाहनों के मालिकों की कुंडली खंगाल रहा है।
अब तक 19 वाहन जब्त, जांच का दायरा बढ़ा
बता दें कि यह कार्रवाई अपराध क्रमांक 04/2024 के तहत की जा रही है। इससे पहले 30 मार्च को बिलासपुर की वेलकम डिस्टलरी और मुंगेली की भाटिया वाइंस से 16 गाड़ियां जब्त की गई थीं। कुम्हारी की इन 3 गाड़ियों को मिलाकर अब तक कुल 19 वाहन जांच एजेंसी के कब्जे में हैं।
क्या है ‘पार्ट-B’ का गणित? यह वह अवैध शराब है जिसे सरकारी दुकानों के काउंटर से ही बेचा जाता था, लेकिन इसका पैसा सरकारी खजाने में जाने के बजाय सीधे घोटाले के मास्टरमाइंड्स (सिंडिकेट) की जेब में जाता था। इसके लिए खास तौर पर निर्धारित गाड़ियों का ही बार-बार इस्तेमाल होता था ताकि सिस्टम में किसी को शक न हो।
रसूखदारों पर शिकंजा बरकरार
इस घोटाले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, निरंजन दास और शराब कारोबारी अनवर ढेबर जैसे बड़े नाम पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। ईओडब्ल्यू अब डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर कड़ियां जोड़ रही है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी डिस्टलरीज पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
चतुर चर्चा: शराब घोटाले की यह जांच अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उस ‘सप्लाई चेन’ को तोड़ने पर केंद्रित है जिसने सालों तक छत्तीसगढ़ के राजस्व को खोखला किया। गाड़ियों की जब्ती यह संकेत है कि सिंडिकेट के ‘लॉजिस्टिक्स’ नेटवर्क की कमर टूट चुकी है।

