रायपुर। छत्तीसगढ़ के बाजारों में इन दिनों एक अजीब विरोधाभास (Paradox) देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर रसोई की शान कहे जाने वाले आलू और प्याज की कीमतें पिछले 10 वर्षों के न्यूनतम स्तर (Lowest Level) पर पहुंच गई हैं, वहीं अपनी सुगंध के लिए मशहूर जवाफूल चावल आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
आलू-प्याज की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट थोक बाजार में आलू इन दिनों महज 6 से 7 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि प्याज की कीमत 10 से 12 रुपये किलो के बीच बनी हुई है। कारोबारियों का कहना है कि इस साल आलू का रिकॉर्ड उत्पादन (Record Production) हुआ है। मांग की तुलना में सप्लाई अधिक होने और परिवहन (Transportation) में आ रही दिक्कतों की वजह से माल स्थानीय स्तर पर ही खपाया जा रहा है, जिससे दाम गिर गए हैं।
जवाफूल चावल में लगी ‘आग’ दूसरी ओर, जवाफूल चावल की कीमतों में जबरदस्त तेजी (Sharp Hike) देखी जा रही है। महज 15 दिनों के भीतर इसके दाम 15 से 25 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। वर्तमान में जवाफूल चावल 220 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बाजार जानकारों के मुताबिक, स्थानीय खपत के बजाय इस चावल का निर्यात (Export) बाहर ज्यादा होने के कारण कीमतों में यह उछाल आया है।
बाजार की ताजा स्थिति (Current Market Status):
- सब्जियां: आलू-प्याज की कीमतें 10 साल के सबसे निचले स्तर पर हैं।
- चावल: जवाफूल चावल के दाम रिकॉर्ड 220 रुपये किलो तक पहुंचे।
- खाद्य तेल: तेल की कीमतों में थोड़ी तेजी है, जो 140 से 152 रुपये लीटर तक बिक रहा है।
- दालें: दालों और चावल की अन्य किस्मों की कीमतों में फिलहाल स्थिरता (Stability) बनी हुई है।
परिवहन की समस्या और मांग में कमी आलू-प्याज के सस्ते होने का एक बड़ा कारण माल परिवहन में आ रही बाधाएं भी हैं। इसकी वजह से बाहर भेजने के बजाय व्यापारी माल को स्थानीय बाजारों (Local Markets) में ही बेचने को मजबूर हैं। पर्याप्त उपलब्धता के कारण कीमतों में गिरावट का यह दौर फिलहाल जारी रहने की संभावना है।
चतुर टिप्पणी बाजार के इस उतार-चढ़ाव (Fluctuation) ने आम जनता को मिलीजुली राहत दी है। जहां सब्जियां सस्ती होने से राहत है, वहीं प्रीमियम चावल और तेल की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट प्रभावित किया है।
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