रायपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पिछले एक साल से चल रही ‘प्रभारी’ व्यवस्था आज खत्म हो सकती है। राज्य सरकार आज छत्तीसगढ़ को नया Full-time DGP (पूर्णकालिक डीजीपी) देने के लिए आदेश जारी कर सकती है।
13 महीने से ‘प्रभारी’ के भरोसे पुलिस विभाग
आपको बता दें कि वर्तमान में Arun Deo Gautam (अरुण देव गौतम) राज्य के प्रभारी डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 1992 बैच के IPS अधिकारी अरुण देव गौतम को 4 फरवरी 2025 को राज्य का Current Charge (चालू प्रभार) दिया गया था। तब से विभाग को स्थाई मुखिया का इंतजार है।
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रेस में ये बड़े नाम हैं शामिल (Top Contenders)
डीजीपी की कुर्सी के लिए UPSC को भेजे गए पैनल में मुख्य रूप से तीन अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं:
- Arun Deo Gautam: वर्तमान प्रभारी डीजीपी (1992 बैच)।
- Himanshu Gupta: रेस में दूसरा बड़ा नाम।
- Pawan Deo: गौतम के बैचमेट, जिनका नाम भी पैनल में शामिल है।
UPSC की सख्ती और सुप्रीम कोर्ट का पेंच
हाल ही में UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया था। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूछा था कि पैनल भेजने के बावजूद अब तक स्थाई नियुक्ति (Appointment) क्यों नहीं की गई?
इसके साथ ही, Supreme Court का भी इस मामले में दबाव है। दरअसल, स्थाई डीजीपी की नियुक्ति को लेकर आज कोर्ट में जवाब पेश किया जाना है। इसी कानूनी दबाव (Legal Pressure) के कारण माना जा रहा है कि सरकार आज ही नाम पर मुहर लगा देगी। सुप्रीम कोर्ट का क्या है पेंच जानने के लिए यहां करें क्लिक
क्यों भारी है अरुण देव गौतम का पलड़ा?
विशेषज्ञों और सूत्रों की मानें तो अरुण देव गौतम का ही पूर्णकालिक डीजीपी बनना लगभग तय है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
- Performance: पिछले 13 महीनों में उनका कामकाज शानदार रहा है।
- Anti-Naxal Operations: उनके नेतृत्व में नक्सल मोर्चे पर पुलिस को बड़ी सफलताएं मिली हैं।
- Government Trust: राज्य सरकार उनके काम करने के तरीके से काफी संतुष्ट नजर आ रही है।

