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दवाइयों के लिए तरस रहे बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी; 4 महीने से डिस्पेंसरी खाली, महासंघ ने दी चेतावनी

CSPSCL

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों के सामने गहरा स्वास्थ्य और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। डंगनिया स्थित पावर कंपनी औषधालय (डिस्पेंसरी) सहित अन्य केंद्रों में पिछले 3-4 महीनों से ‘लोकल परचेज’ (स्थानीय खरीद) की दवाइयां मिलना पूरी तरह बंद हो गई हैं।इस अव्यवस्था से आक्रोशित ‘छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी संघ (महासंघ)’ ने पावर कंपनी के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

गंभीर बीमारियों की दवाइयों के लिए भटक रहे बुजुर्ग

महासंघ के प्रदेश महामंत्री पुनारद राम साहू ने बताया कि पावर कंपनी के हजारों पेंशनर हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह (Diabetes) जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इन बीमारियों के लिए नियमित जीवन रक्षक दवाओं का सेवन अनिवार्य है। औषधालय में दवाओं की अनुपलब्धता के कारण बुजुर्गों को बाजार से महंगी दवाएं नकद खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। संघ ने इसे अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त ‘जीवन के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन बताया है।

प्रशासनिक विफलता पर उठाए सवाल

ज्ञापन में प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा गया है कि जिस तरह बिजली आपूर्ति के ‘फॉल्ट’ को प्राथमिकता पर ठीक किया जाता है, उसी प्रकार स्वास्थ्य तंत्र के ‘फॉल्ट’ को ठीक करने में प्रबंधन बार-बार विफल हो रहा है। नियमित दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रबंधन का वैधानिक दायित्व है।

महासंघ की प्रमुख मांगें:

महासंघ ने चेतावनी देते हुए प्रबंधन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

 तत्काल आपूर्ति: डंगनिया औषधालय में ‘लोकल परचेज’ दवाओं की सप्लाई तुरंत बहाल की जाए

कैशलेस सुविधा: यदि दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी कार्यरत कर्मचारियों की तरह ‘कैशलेस स्कीम’ के दायरे में लाया जाए

शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति: बाहर से खरीदी गई दवाओं के बिलों का 100% रिइम्बर्समेंट (Full Reimbursement) सुनिश्चित किया जाए।

दोषियों पर कार्रवाई: निविदा (Tender) प्रक्रिया में देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए

अंतिम चेतावनी

महासंघ ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य और सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जल्द ही त्वरित आदेश जारी नहीं किए गए, तो संगठन आगे उग्र कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।

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