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पदोन्नति विवाद का ‘शॉर्ट सर्किट’: डिमोशन की तलवार और सामूहिक इस्तीफे की गूंज, सर्वहित संघ और आरक्षित वर्ग के बीच फंसा पावर मैनेजमेंट

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बिजली कंपनी पदोन्नति में आरक्षण विवाद रायपुर । छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों में इस समय स्थिति किसी ‘ग्रिड फेलियर’ जैसी हो गई है। पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) के मुद्दे पर हाईकोर्ट के फैसले ने कंपनी के भीतर एक ऐसा ‘शॉर्ट सर्किट’ पैदा कर दिया है, जिसकी चिंगारी अब आंदोलन की आग बन चुकी है।

एक तरफ डिमोशन (Demotion) की लटकती तलवार है, तो दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग के इंजीनियरों के सामूहिक इस्तीफे (Mass Resignation) की गूंज। इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई के बीच बिजली कंपनी का मैनेजमेंट बुरी तरह फंस गया है।

विवाद का ‘वोल्टेज’ क्यों बढ़ा? (The Core Conflict)

बिलासपुर हाईकोर्ट ने साल 2024 में पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि:

सर्वहित संघ: “हक और नियम की बहाली” (Sarvahit Sangh’s Stand)

सर्वहित संघ, जो सामान्य और पिछड़ा वर्ग के हितों की पैरवी कर रहा है, इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रहा है।

आरक्षित वर्ग का ‘हाई-वोल्टेज’ आंदोलन (Reserved Category Protest)

दूसरी ओर, आरक्षित वर्ग के अधिकारी और कर्मचारी इस आदेश को अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन मान रहे हैं। उन्होंने मैनेजमेंट को सीधी चेतावनी दी है:

  1. 20 अप्रैल: एक दिन का सामूहिक अवकाश (Mass Leave)
  2. 27 अप्रैल: अनिश्चितकालीन हड़ताल और काम बंद।
  3. इस्तीफे की धमकी: “अपमानित होकर नौकरी करने से बेहतर है घर बैठना”—इस नारे के साथ कई इंजीनियरों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत (No Relief from SC): हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। 10 अप्रैल को सुनवाई होनी थी, लेकिन तारीख आगे बढ़ जाने से आरक्षित वर्ग की उम्मीदों को ‘शॉक’ लगा है। फिलहाल कोई Stay (रोक) नहीं मिला है।

मैनेजमेंट की सख्ती: ‘लोड’ बढ़ने पर कार्रवाई की तैयारी

आंदोलन की घोषणा ने कंपनी प्रबंधन की नींद उड़ा दी है। प्रबंधन ने ‘डैमेज कंट्रोल’ करने के बजाय सख्ती का रास्ता चुना है:

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या होगा आगे? (What’s Next?)

बिजली कंपनी के गलियारों में अब केवल एक ही चर्चा है—कि क्या 27 अप्रैल से पहले सरकार कोई बीच का रास्ता निकालेगी?

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