
Coal Stock रायपुर (चतुरपोस्ट): मानसून की झमाझम बारिश के कारण देश भर में कोयला खदानों से उत्पादन और रेल परिवहन (Rakes Supply) प्रभावित हुआ है। इसके चलते गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई पावर प्लांटों में कोयले की किल्लत की स्थिति बन रही है। हालाँकि, छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है—प्रदेश के सरकारी ताप विद्युत संयंत्रों (CSPGCL) में कोयले का ऐसा मजबूत बैकअप मौजूद है कि मानसून के दौरान यहाँ बिजली संकट की कोई गुंजाइश नहीं है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की ताजा डेली कोल स्टॉक रिपोर्ट में देश भर के पावर प्लांटों में ईंधन की स्थिति का पूरा ब्योरा सामने आया है।
छत्तीसगढ़ को बड़ी राहत: जरूरत से 179% अधिक कोयला रिजर्व
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (CSPGCL) के तीनों प्रमुख संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 2,840 मेगावाट (MW) है। CEA के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
- ओवरऑल स्टॉक: प्रदेश के प्लांटों को जहाँ मानक नियमों के तहत 8.09 लाख टन (809.2 हजार टन) कोयले की आवश्यकता होती है, वहीं वर्तमान में 14.51 लाख टन (1,451.3 हजार टन) का सुरक्षित भंडार मौजूद है। यानी छत्तीसगढ़ के पास तय मानक से 179% से 180% अधिक कोयला है।
- एक भी प्लांट ‘क्रिटिकल’ नहीं: CEA की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का एक भी पावर प्लांट ‘क्रिटिकल कोल स्टॉक’ (गंभीर संकट) की श्रेणी में दर्ज नहीं है।
प्रदेश के तीनों संयंत्रों का हाल:
- DSPM ताप विद्युत संयंत्र (कोरबा): 500 MW क्षमता वाले इस प्लांट में 160.2 हजार टन मानक जरूरत के मुकाबले 364.9 हजार टन (228%) कोयला रिजर्व है।
- कोरबा-पश्चिम HTPS: 1,340 MW क्षमता वाले इस संयंत्र में 298.9 हजार टन जरूरत के मुकाबले 531.0 हजार टन (178%) का विशाल स्टॉक है।
- मड़वा ताप विद्युत संयंत्र: 1,000 MW क्षमता वाले मड़वा प्लांट में 350.1 हजार टन मानक के मुकाबले 555.4 हजार टन (159%) कोयला मौजूद है।
क्यों मजबूत है छत्तीसगढ़? खदानों के पास स्थित (Pithead) होने और SECL से सीधे कोयला कनेक्टिविटी के कारण भारी बारिश के बावजूद रैक और गाड़ियों की सप्लाई में छत्तीसगढ़ को कोई रुकावट नहीं आई है।
पड़ोसी राज्यों में कैसा है कोयला स्टॉक?
जहां छत्तीसगढ़ बेफिक्र है, वहीं देश के कई अन्य राज्यों में मानसून का असर पावर प्लांटों के कोयला डिपो पर साफ देखा जा सकता है:
1. मध्य प्रदेश (MP): खंडवा प्लांट में चिंता
मध्य प्रदेश पावर जेनरेशन कंपनी के प्लांटों में औसतन 38% कोयला बचा है। विशेषकर 2,520 MW क्षमता वाले श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्रोजेक्ट (खंडवा) में मानक आवश्यकता (758.9 हजार टन) का महज 13% (101.7 हजार टन) स्टॉक ही रह गया है, जो काफी संवेदनशील स्थिति में है।
2. उत्तर प्रदेश (UP): अनपरा-ओबरा संभले, बाकी जगह दबाव
उत्तर प्रदेश में पिटहेड प्लांट होने के कारण अनपरा (50% स्टॉक) सुरक्षित स्थिति में है। हालाँकि, राज्य के गैर-पिटहेड प्लांटों (जैसे हरदुवागंज, ओबरा और परीक्षा) में रैक देरी के कारण कुल औसतन स्टॉक 42% के आसपास बना हुआ है।
3. ओडिशा (Odisha): छत्तीसगढ़ की तरह ही मजबूत स्थिति
ओडिशा भी महानदी कोलफील्ड्स (MCL) के पास होने के कारण सुरक्षित है। राज्य के इब वैली (IB Valley) पावर प्लांट में मानक आवश्यकता का 97% (343.5 हजार टन) कोयला उपलब्ध है, जिससे ओडिशा में भी बिजली उत्पादन निर्बाध जारी है।
इन राज्यों में कोल संकट की आहट (Critical Category)
रेल परिवहन में देरी और लंबी दूरी के कारण कुछ राज्यों में कोयले का स्टॉक निचले स्तर पर पहुँच गया है:
- गुजरात (GSECL): वणाकबोरी (19%) और गांधीनगर (26%) जैसे बड़े संयंत्रों में स्टॉक काफी कम है, जिसके चलते कुल राज्य औसतन स्टॉक मात्र 31% रह गया है।
- महाराष्ट्र (MAHAGENCO): भुसावल (41%), कोराडी (26%) और नासिक (49%) जैसे प्लांटों में मालगाड़ियों (Rakes) के देर से पहुँचने का असर पड़ा है।
चतुर विचार
मानसून के दौरान देश भर के कई राज्यों में रेलवे और कोयला मंत्रालय रैक सप्लाई बढ़ाने में जुटे हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ अपने मजबूत कोयला भंडार के दम पर पूरी तरह बेफिक्र है, और प्रदेशवासियों को आने वाले दिनों में किसी भी तरह की बिजली कटौती या उत्पादन संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।







