रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय कैबिनेट (Say Cabinet) ने राज्य के खनिज संसाधनों के दोहन और रेत की कालाबाजारी रोकने के लिए एक बड़ा प्रहार किया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम में व्यापक संशोधन को मंजूरी दी गई है, जिससे अब रेत खदानों पर निजी पट्टेदारों का एकाधिकार (Monopoly) खत्म होगा और आम जनता को आसानी से रेत मिल सकेगी।
सरकारी कंपनियों को मिलेंगी रेत खदानें सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के लिए रेत खदानें आरक्षित (Reserved) करने का प्रावधान किया है। इससे न केवल रेत की आपूर्ति का संकट (Supply Crisis) दूर होगा, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में भी सरकारी नियंत्रण के कारण रेत की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
अवैध उत्खनन पर 5 लाख तक की पेनल्टी खनन क्षेत्र में पारदर्शिता (Transparency) लाने के लिए सरकार ने दंड के प्रावधानों को बेहद सख्त कर दिया है। अब खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन या भंडारण पर कम से कम 25 हजार और अधिकतम 5 लाख रुपये का जुर्माना (Penalty) लगाया जाएगा। साथ ही, अवैध परिवहन के मामलों में गाड़ी छोड़ने के लिए भारी जमानत राशि का निर्धारण भी किया गया है।
कैबिनेट के बड़े फैसले (Key Highlights):
- खदानों का आरक्षण: अब सरकारी कंपनियां सीधे रेत खदानों का संचालन कर सकेंगी।
- बंद खदानों पर एक्शन: अकारण बंद रहने वाली खदानों को ‘लैप्स’ (Lapse) घोषित करने का कठोर प्रावधान।
- राजस्व में वृद्धि: 30 सालों के लंबे अंतराल के बाद अनिवार्य भाटक दर (Dead Rent) में बढ़ोतरी की गई है।
- Ease of Doing Business: पूरे प्रदेश में रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र के नियम अब एकसमान (Uniform) होंगे।
- जमानत राशि: अवैध परिवहन में पकड़े जाने पर सुपुर्दगी के लिए नई जमानत शर्तें लागू।
बंद खदानों को लेकर सख्त रुख बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जो खदानें शिथिल (Inactive) पड़ी हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। 30 साल बाद भाटक दरों में वृद्धि और खदानों को निरस्त करने के प्रावधानों से यह सुनिश्चित होगा कि खनिज संसाधनों का सुव्यवस्थित दोहन (Systematic Exploitation) हो और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके।
Chatur राय सरकार के इस निर्णय से जहाँ एक ओर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण की सुरक्षा (Environmental Protection) और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा। यह कदम राज्य के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए मील का पत्थर (Milestone) साबित होगा।
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