Chhattisgarh रायपुर। अनुसूचित जाति जनजाति विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत कार्यभारित कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और रिकवरी के संबंध में मंत्रालय में 20 फरवरी को 3 बजे शासन स्तर पर सुनवाई आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारी संघ का पक्ष विस्तार से सुना गया।
प्रदेश महामंत्री योगेश चौरे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने शासन के समक्ष यह तथ्य रखा कि वर्ष 2014 की सीधी भर्ती कर्मचारियों को 3 वर्ष पूर्ण होने पर नियमित वेतनमान प्रदान किया जाना था। कई जिलों में समय पर वेतनमान दिया गया, लेकिन बस्तर जिले सहित कुछ स्थानों पर विलंब से प्रदान किया गया। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में विभाग द्वारा जारी आदेश में अतिरिक्त शर्त जोड़ते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गई, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक क्षति हो रही है तथा वेतन से रिकवरी की जा रही है।
संघ ने स्पष्ट किया कि नियमित वेतनमान प्राप्त होने के पश्चात अगले वर्ष से वार्षिक वेतन वृद्धि मिलना कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है। देश में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि 10 वर्ष पूर्ण होने के पश्चात ही वेतन वृद्धि दी जाए।
सुनवाई अनुसूचित जाति जनजाति विकास मंत्रालय के कक्ष क्रमांक AD 1 में हुई। सुनवाई के समय संयुक्त सचिव और अवर सचिव और दो अन्य अधिकारी उपस्थित थे कर्मचारी संघ के 8 सदस्य प्रतिनिधिमंडल उपस्थित थे सुनवाई के दौरान संयुक्त सचिव द्वारा संबंधित प्रकरण की संपूर्ण नोटशीट एवं आदेश प्रस्तुत कर विधिसम्मत निर्णय लेने हेतु निर्देशित किया गया।
कर्मचारी संघ ने शासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि इस प्रकरण में न्यायोचित और त्वरित निर्णय लेकर कर्मचारियों को राहत प्रदान की जाएगी। प्रतिनिधि मंडल में योगेश चौरे क्रांति महामंत्री सुरेश डीडी अध्यक्ष संचालनालय कर्मचारी संघ मंगलू उसेंडी जिला अध्यक्ष नारायणपुर दिलीप आमदे राजा राकेश ठाकुर सहित अन्य प्रतिनिधी थे।