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बड़ी खबर: CM के विभाग में ‘बगावत’! बिजली कंपनी के हजारों अफसर-कर्मचारी ने दी सामूहिक इस्तीफा की चेतावनी, आंदोलन का ऐलान

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Power company रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बिजली विभाग के आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों ने अपनी ही सरकार और प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ’ ने गंभीर आरोप लगाते हुए चरणबद्ध आंदोलन और सामूहिक इस्तीफे का ऐलान किया है।

संघ का आरोप है कि ऊर्जा विभाग, जो स्वयं मुख्यमंत्री के अधीन है, वहां संवैधानिक अधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह काम कर रहा प्रबंधन

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर आरएल ध्रुव और महासचिव विजय नाग ने बताया कि बिजली कंपनी में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों की अनदेखी कर और हाई कोर्ट के फैसलों की गलत व्याख्या कर मनमाने तरीके से पदोन्नति कर रहा है।

“विद्युत कंपनी राज्य शासन के ‘पदोन्नति नियम 2003’ को दरकिनार कर खुद के नियम चला रही है। ऐसा लग रहा है जैसे यह सरकारी विभाग नहीं बल्कि कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो।”

Power company आंदोलन की रूपरेखा: कब क्या होगा?

संघ ने अपनी लंबित मांगों और प्रबंधन की तानाशाही के विरोध में आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आंदोलन का शेड्यूल इस प्रकार है:

गर्मी में बढ़ सकती है आम जनता की मुसीबत

संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस आंदोलन के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत कंपनी प्रबंधन की होगी। भीषण गर्मी के मौसम में यदि 45 प्रतिशत कर्मचारी काम बंद करते हैं, तो राज्य में बिजली संकट गहरा सकता है।

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प्रेस वार्ता में कार्यकारी प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर एचके मेश्राम, इंजीनियर राजेश बंजारा और इंजीनियर मनहरण चंद्रवंशी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। संघ ने अन्य संगठनों से भी इस लड़ाई में सहयोग की अपील की है।

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